शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और शिष्य मुकुंदानंद पर यौन शोषण की FIR दर्ज, मुकुंदानंद का तीखा जवाब
प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ यौन शोषण के गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है। कोर्ट के आदेश के बाद हुई इस कार्रवाई पर मुकुंदानंद ने अपनी तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ऐसे "घृणित आरोप" लगाने के बजाय उन्हें "गोली मार देना" बेहतर होगा। मुकुंदानंद ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताया है।
आरोपों को बताया बेबुनियाद और निराधार
आजतक से हुई विशेष बातचीत में मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने स्पष्ट किया कि उन पर और शंकराचार्य पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से झूठे और मनगढ़ंत हैं। उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के चरित्र को "क्रिस्टल की तरह साफ" और "चरित्रवान" बताया। मुकुंदानंद ने दावा किया कि आरोप लगाने वाला व्यक्ति, जिसका नाम आशुतोष है, एक "हिस्ट्रीशीटर" है जिसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 76A है। उनके अनुसार, आशुतोष और उसके परिवार का मुख्य पेशा ही फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर लोगों को ब्लैकमेल करना है।
वाराणसी के विद्या मठ से जुड़ा मामला
यह पूरा प्रकरण वाराणसी के विद्या मठ आश्रम में वेदपाठी बटुकों के कथित यौन शोषण से संबंधित है। इसी मामले में कोर्ट के निर्देश पर प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। मुकुंदानंद ने बताया कि आशुतोष ने पहले भी उनके खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए थे।
- पहला आरोप: मुकुंदानंद पर गला दबाने और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर हथियार फेंकने का प्रयास करने का आरोप। मुकुंदानंद ने इसे 18 जनवरी की घटना बताया, जब विश्व मीडिया वहां मौजूद थी और सच्चाई से इसका कोई संबंध नहीं था।
- दूसरा आरोप: यह वर्तमान यौन शोषण का आरोप है, जिस पर कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। मुकुंदानंद ने कहा कि वे इस एफआईआर का स्वागत करते हैं क्योंकि जांच के बाद ही "दूध का दूध और पानी का पानी" होगा।
न्यायपालिका पर भरोसा, लेकिन सरकार पर सवाल
मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने भारतीय न्यायपालिका और संविधान पर अपना पूर्ण विश्वास व्यक्त किया। हालांकि, उन्होंने वर्तमान सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह "हिंदूवादी सरकार" शंकराचार्य जैसे पूजनीय पद पर ऐसे "घिनौने आरोप" लगाकर "नीचता" पर उतर जाएगी, इसकी कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने सरकार से कम से कम शंकराचार्य के पद की प्रतिष्ठा का सम्मान करने का आग्रह किया।
2500 वर्षों के इतिहास में शंकराचार्य पर ऐसा आरोप कभी नहीं लगा
मुकुंदानंद ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय इतिहास में पिछले 2500 सालों में किसी भी शंकराचार्य पर इस प्रकार का "घृणित आरोप" लगाने की हिम्मत किसी ने नहीं की है, क्योंकि शंकराचार्य का जीवन हमेशा पवित्र और सत्यनिष्ठ रहा है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य हमेशा सत्य का साथ देते हैं, शायद इसीलिए उनके साथ ऐसा हो रहा है।
आरोपी आशुतोष और रामभद्राचार्य का संबंध
मुकुंदानंद ने आरोप लगाया कि आशुतोष, जिसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 76A है, रामभद्राचार्य का शिष्य है और कथित तौर पर "योगी-मोदी का खास" है। उनके अनुसार, चूंकि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद हमेशा सत्य और कठोर बात कहते हैं, इसलिए कुछ लोगों को यह बुरा लगता है। मुकुंदानंद ने आशंका जताई कि यह सरकार शंकराचार्य का मुंह बंद कराना चाहती है और इसी उद्देश्य से इस प्रकार की "नीचता" पर उतर आई है। उन्होंने बताया कि देशभर से आशुतोष द्वारा ब्लैकमेल किए गए कई पीड़ित लोगों ने उनसे संपर्क किया है, और आशुतोष के भाई-बहन समेत पूरा परिवार ऐसे कृत्यों में शामिल है।
विद्या मठ की बदनामी पर जवाब
विद्या मठ की बदनामी के सवाल पर मुकुंदानंद ने कहा कि मठ की बदनामी तभी होगी जब आरोप सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि विद्या मठ के स्वामी ने बच्चों के कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है, जितना काम न तो योगी-मोदी ने किया है और न ही रामभद्राचार्य ने। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि विद्या मठ बदनाम नहीं होगा और शंकराचार्य पूरी तरह से चरित्रवान हैं। उन्होंने जांच में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
मुकुंदानंद ने अंत में कहा कि शंकराचार्य भी "आसान रास्ता" चुनकर निजी जेट में घूमते हुए मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री को आशीर्वाद दे सकते थे, लेकिन उन्होंने "कठिनाई और सत्य का रास्ता" चुना। उन्होंने कहा, "अगर सत्य बोलना अपराध है तो हम अपराधी हैं। हम न तो योगी आदित्यनाथ के गुलाम हैं और न ही नरेंद्र मोदी के गुलाम हैं। हम किसी सरकार के गुलाम नहीं हैं। जो गलत करेगा उसका विरोध किया जाएगा।"