विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद कैसे मजबूत रहा भारत

विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद कैसे मजबूत रहा भारत
शनिवार को आईआईएम रायपुर के दीक्षांत समारोह में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने छात्रों को संबोधित करते हुए भारत की असाधारण मजबूती और वैश्विक चुनौतियों के बीच उसकी बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में दुनिया ने कोरोना महामारी, भू-राजनीतिक संघर्षों और तेजी से बदलते जलवायु जैसे कई...

शनिवार को आईआईएम रायपुर के दीक्षांत समारोह में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने छात्रों को संबोधित करते हुए भारत की असाधारण मजबूती और वैश्विक चुनौतियों के बीच उसकी बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में दुनिया ने कोरोना महामारी, भू-राजनीतिक संघर्षों और तेजी से बदलते जलवायु जैसे कई बड़े झटके झेले हैं, लेकिन भारत इन सभी बाधाओं को पार करते हुए एक शक्तिशाली वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभरा है। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि आज भारत अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।

मुख्य बिंदु

  • पिछले एक दशक में दुनिया ने कोरोना महामारी, मध्य पूर्व जैसे वैश्विक संघर्षों और जलवायु परिवर्तन जैसी अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना किया है।
  • इन तमाम वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद, भारत न केवल दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना, बल्कि एक मजबूत और प्रभावशाली वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा।
  • भारत की इस सफलता का श्रेय निर्णायक राष्ट्रीय नेतृत्व और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने वाले समावेशी विकास मॉडल को दिया गया है।
  • डिजिटल क्रांति और आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) ने देश के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच का काम किया है, जिससे भारत की राष्ट्रीय क्षमताएं बढ़ी हैं।
  • जयशंकर ने भोजन, स्वास्थ्य और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि आज की दुनिया में तकनीक और संसाधनों का उपयोग अक्सर हथियार के रूप में किया जा रहा है।
  • भारत की विदेश नीति अब घरेलू उत्पादकों के लिए नए वैश्विक बाजार खोजने और विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

अब तक क्या पता चला है

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आईआईएम रायपुर में अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि पिछला दशक वैश्विक स्तर पर अत्यधिक अस्थिर रहा है। उन्होंने कोरोना महामारी के कारण काम करने के तरीकों में आए बदलावों और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों (जैसे मध्य पूर्व में) के दूरदराज के समाजों पर पड़ने वाले गहरे प्रभावों का जिक्र किया। उनके अनुसार, इन तमाम बाहरी झटकों के बावजूद, भारत एक मजबूत वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है और आज विश्व कूटनीति में अपनी एक खास जगह बना चुका है।

उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इतनी बड़ी बाधाओं के बावजूद भारत का दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना एक बड़ी उपलब्धि है। इस सफलता का श्रेय उन्होंने देश के निर्णायक नेतृत्व और समावेशी विकास को दिया, जिसने समाज के हर तबके को साथ लेकर चलने का काम किया। जयशंकर ने भारत की इस मजबूती के पीछे दो प्रमुख स्तंभों – डिजिटल क्रांति और आत्मनिर्भरता – को उजागर किया। उन्होंने बताया कि भारत ने न केवल तकनीक को अपनाया है, बल्कि उसे अपनी जीवनशैली का अभिन्न अंग बना लिया है, जिससे कई विकसित देश भी भारत की डिजिटल ताकत से चकित हैं।

विदेश मंत्री ने राष्ट्रीय क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि यह किसी भी बड़े जोखिम से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है। उन्होंने 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को केवल एक दूरदर्शिता नहीं, बल्कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। जयशंकर ने भोजन, स्वास्थ्य और ऊर्जा सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आगाह किया कि आज की दुनिया में तकनीक और संसाधनों को अक्सर एक-दूसरे के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में, उन्होंने सुझाव दिया कि हमें उन क्षेत्रों में खुद को सशक्त बनाना होगा जो हमारे नियंत्रण में हैं, और जहाँ हम सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकते, वहाँ विश्वसनीय साझेदारों के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की विदेश नीति अब भारतीय उत्पादकों के लिए नए बाजार खोजने और संकट के समय अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर अधिक केंद्रित है। अंत में, उन्होंने स्नातक छात्रों को भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करते हुए कहा कि वे भाग्यशाली हैं कि वे एक विकसित भारत के सपने को हकीकत में बदलते हुए देखेंगे, जहाँ 'ब्रांड इंडिया' को विश्व स्तर पर एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में पहचाना जा रहा है।

संदर्भ और पृष्ठभूमि

विदेश मंत्री एस. जयशंकर का संबोधन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यवस्था कई मोर्चों पर अभूतपूर्व दबाव का सामना कर रही है। पिछले एक दशक को वास्तव में उथल-पुथल भरा कहा जा सकता है। कोविड-19 महामारी ने न केवल स्वास्थ्य प्रणालियों को चुनौती दी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी अस्त-व्यस्त कर दिया, आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित किया और काम करने के तौर-तरीकों में आमूल-चूल परिवर्तन लाए, जैसे कि दूरस्थ कार्य का उदय। इसके साथ ही, भू-राजनीतिक संघर्षों ने, जैसे कि मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और पूर्वी यूरोप में युद्ध, ऊर्जा की कीमतों को बढ़ाया, खाद्य सुरक्षा को प्रभावित किया और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में दरारें पैदा कीं। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जिससे चरम मौसमी घटनाएँ, प्राकृतिक आपदाएँ और संसाधनों की कमी जैसे मुद्दे सामने आए हैं, जो देशों की स्थिरता और विकास को सीधे प्रभावित करते हैं।

इन वैश्विक झटकों के बीच, भारत ने अपनी लचीली क्षमता का प्रदर्शन किया है। जयशंकर ने भारत की इस मजबूती के पीछे कुछ प्रमुख कारकों को रेखांकित किया। निर्णायक नेतृत्व का अर्थ है संकट के समय में त्वरित और प्रभावी नीतिगत निर्णय लेना, जो भारत ने महामारी के दौरान टीकाकरण अभियान और आर्थिक राहत पैकेजों के माध्यम से प्रदर्शित किया। समावेशी विकास मॉडल ने समाज के निचले तबके तक सरकारी योजनाओं और लाभों को पहुँचाने में मदद की है, जैसे जन धन योजना, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और विभिन्न ग्रामीण विकास कार्यक्रम, जिससे देश के भीतर असमानता कम हुई है और आंतरिक स्थिरता बनी है।

भारत की डिजिटल क्रांति ने भी एक सुरक्षा कवच का काम किया है। आधार, यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) और कोविन जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया, सरकारी सेवाओं की डिलीवरी को सुव्यवस्थित किया और महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान को संभव बनाया। भारत की डिजिटल क्षमताएं अब दुनिया भर में एक मॉडल के रूप में देखी जा रही हैं। वहीं, आत्मनिर्भर भारत की पहल को केवल एक आर्थिक रणनीति के रूप में नहीं, बल्कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में एक आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों (जैसे दवाइयाँ, रक्षा उपकरण, सेमीकंडक्टर) में बाहरी निर्भरता को कम करना और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है, ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में किसी भी व्यवधान का सामना किया जा सके।

जयशंकर ने तकनीक और संसाधनों के हथियार के रूप में उपयोग होने की चेतावनी दी, जिसका अर्थ है कि देश अपनी भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को साधने के लिए ऊर्जा, खाद्य या उन्नत तकनीक जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों पर नियंत्रण का उपयोग कर सकते हैं। यह परिदृश्य भारत के लिए अपनी राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करने और रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए आत्मनिर्भरता को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। भारत की विदेश नीति भी राष्ट्रीय हितों को अधिक सक्रिय रूप से साधने के लिए विकसित हुई है, जिसमें आर्थिक कूटनीति के माध्यम से भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार खोजना और विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। यह नीति अब 'ब्रांड इंडिया' को विश्व स्तर पर एक विश्वसनीय और जिम्मेदार भागीदार के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है।

आगे क्या होगा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संबोधन से यह स्पष्ट होता है कि भारत अगले दशक में एक विकसित राष्ट्र बनने के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर अग्रसर है। इस यात्रा में देश का नेतृत्व राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करने, विशेष रूप से डिजिटल नवाचार और आत्मनिर्भरता के माध्यम से, पर केंद्रित रहेगा। सरकार भारतीय उत्पादकों के लिए वैश्विक बाजार के अवसरों का लगातार पता लगाएगी और अपनी विदेश नीति के माध्यम से विदेशों में भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देगी।

स्नातक कर रहे छात्रों को संबोधित करते हुए, जयशंकर ने उन्हें इस 'विकसित भारत' के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। आने वाले वर्षों में, युवा पेशेवरों से अपेक्षा की जाती है कि वे नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग लें। 'ब्रांड इंडिया' की वैश्विक साख और एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उसकी पहचान को और मजबूत करने के लिए रणनीतिक साझेदारियों और बहुपक्षीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी जारी रहेगी। यह सब भारत को वैश्विक मंच पर एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • प्रश्न: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किस समारोह में भाषण दिया?
    उत्तर: उन्होंने आईआईएम रायपुर के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित किया।
  • प्रश्न: जयशंकर के अनुसार, पिछले दशक में दुनिया को किन प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
    उत्तर: पिछले दशक में कोरोना महामारी, भू-राजनीतिक संघर्षों (जैसे मध्य पूर्व में) और तेजी से बदलते जलवायु जैसी प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
  • प्रश्न: भारत की मजबूती के पीछे जयशंकर ने कौन से दो मुख्य कारण बताए?
    उत्तर: उन्होंने डिजिटल क्रांति और आत्मनिर्भरता को भारत की मजबूती के दो मुख्य कारण बताया।
  • प्रश्न: 'आत्मनिर्भर भारत' को जयशंकर ने किस रूप में वर्णित किया?
    उत्तर: उन्होंने इसे केवल एक दूरदर्शिता नहीं, बल्कि आज के दौर की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया, खासकर जब तकनीक और संसाधनों का उपयोग हथियार के रूप में किया जा रहा हो।
  • प्रश्न: भारत की विदेश नीति का नया फोकस क्या है?
    उत्तर: भारत की विदेश नीति अब भारतीय उत्पादकों के लिए नए वैश्विक बाजार तलाशने और संकट के समय विदेशों में रहने वाले अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर अधिक केंद्रित है।