ब्रेकिंग न्यूज़: नवादा के रवि राज ने दृष्टिबाधा को हराकर UPSC में 20वीं रैंक पाई, प्रेरणादायक सफलता

ब्रेकिंग न्यूज़: नवादा के रवि राज ने दृष्टिबाधा को हराकर UPSC में 20वीं रैंक पाई, प्रेरणादायक सफलता

दृष्टिबाधा के बावजूद UPSC में 20वीं रैंक: नवादा के रवि राज की प्रेरणादायक कहानी

बिहार के नवादा जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। नवादा के रवि राज ने अपनी आंखों की रोशनी न होने के बावजूद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में 20वीं रैंक हासिल कर देश भर में अपना नाम रोशन किया है। उनकी यह उपलब्धि लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है।

अदम्य इच्छाशक्ति और संघर्ष का सफर

नवादा के अकबरपुर प्रखंड स्थित महुली गांव के निवासी रवि राज की कहानी बचपन से ही संघर्षों से भरी रही है। एक किसान परिवार में जन्मे रवि ने बचपन में एक लंबी बीमारी के कारण अपनी आंखों की रोशनी पूरी तरह खो दी थी। जहाँ कई लोगों को लगा कि अब उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है, वहीं उनकी मां विभा सिन्हा ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने बेटे के सपनों को पंख देने का प्रण लिया और रवि को लगातार प्रेरित करती रहीं।

डिजिटल तकनीक और मां का अनमोल साथ

रवि राज की पढ़ाई का तरीका बेहद अनूठा और अनुशासित था। वे प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक पढ़ाई करते थे। आंखों की रोशनी न होने के बावजूद, उन्होंने आधुनिक डिजिटल तकनीक का भरपूर उपयोग किया, जिससे उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने में काफी मदद मिली। इस पूरे सफर में उनकी मां ने एक मार्गदर्शक और सहायक की भूमिका निभाई, जो उनके लिए किताबें पढ़ती थीं और उन्हें हर कदम पर सहारा देती थीं।

  • नियमित अध्ययन: रवि राज रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे।
  • डिजिटल साधनों का उपयोग: उन्होंने पढ़ाई के लिए आधुनिक डिजिटल उपकरणों का सहारा लिया।
  • मां का अटूट समर्थन: उनकी मां ने इस यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बीपीएससी में सफलता, पर लक्ष्य था IAS

यह पहली बार नहीं है जब रवि राज ने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। इससे पहले, उन्होंने नवंबर 2024 में आयोजित 69वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की थी। इस परीक्षा में उनका चयन राजस्व अधिकारी के पद पर हुआ था। तत्कालीन जिलाधिकारी रवि प्रकाश ने उनकी इस उपलब्धि पर उन्हें सम्मानित भी किया था। हालांकि, रवि राज का लक्ष्य हमेशा से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बनना था, इसलिए उन्होंने राजस्व अधिकारी का पद ग्रहण नहीं किया और अपने बड़े सपने को पूरा करने के लिए अथक प्रयास जारी रखे।

रवि राज की यह सफलता यह दिखाती है कि शारीरिक चुनौतियां सिर्फ मन की होती हैं। यदि व्यक्ति में सच्ची लगन और मेहनत करने का जज्बा हो, तो वह किसी भी ऊंचाई को छू सकता है। उनकी यह कहानी न केवल नवादा, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्रोत है।