मध्य प्रदेश के कटनी जिले से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया है। इस चौंकाने वाले वायरल वीडियो में एक विशालकाय बाघ जंगल में स्थित भगवान भोलेनाथ के एक प्राचीन शिवलिंग पर अपना सिर रगड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। यह घटना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है और हर कोई इसके पीछे का रहस्य जानना चाहता है।
कटनी के जंगल में बाघ का अद्भुत व्यवहार
यह अविश्वसनीय दृश्य कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील के शाहडार गांव के पास घने जंगल का है। इस जंगल में महादेव का एक अति प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक बाघ बेहद शांत और सहज भाव से शिवलिंग के करीब आता है। कुछ देर तक वह शिवलिंग पर न सिर्फ अपना सिर रगड़ता है, बल्कि अपनी जीभ से उसे चाटता भी नजर आता है। यह नजारा सचमुच हैरान कर देने वाला है।
बाघ के इस अनोखे व्यवहार का क्या है कारण?
इस घटना को लेकर लोगों में अलग-अलग तरह की राय बन रही है।
- आस्था और भक्ति का पहलू: कई लोग इसे आस्था और भक्ति से जोड़कर देख रहे हैं, मानो बाघ भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहा हो।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: वहीं, वन विभाग के अधिकारी इस व्यवहार को जानवरों के स्वाभाविक क्रियाकलाप का हिस्सा मानते हैं। उनका कहना है कि जंगली जानवर, खासकर बाघ, अक्सर अपनी गंध छोड़ने (क्षेत्र चिन्हित करने के लिए), खुजली मिटाने या अपने शरीर को साफ करने के लिए पत्थरों, पेड़ों या अन्य ठोस वस्तुओं पर अपना सिर या शरीर रगड़ते हैं। यह उनके प्राकृतिक व्यवहार का एक सामान्य हिस्सा है।
वन विभाग सतर्क: ग्रामीणों को चेतावनी
क्षेत्रीय रेंजर अजय मिश्रा ने इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि यह वीडियो शाहडार गांव से लगभग 400 मीटर की दूरी पर रिकॉर्ड किया गया है।
लगातार गश्त: वन विभाग की टीमें पूरे क्षेत्र में लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
ग्रामीणों को सलाह: आस-पास के ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने और पूरी तरह से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
यह उल्लेखनीय है कि शाहडार के जंगलों में बाघों और तेंदुओं की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। हालांकि, किसी जंगली जानवर का इतनी आसानी से और इतनी करीब से इंसानी बस्तियों के पास इस तरह का व्यवहार प्रदर्शित करना लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। मध्य प्रदेश के इस लेटेस्ट अपडेट पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।