महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव परिणाम: बीजेपी-महायुति का प्रचंड प्रदर्शन, उद्धव-राज की पकड़ कमजोर

महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव परिणाम: बीजेपी-महायुति का प्रचंड प्रदर्शन, उद्धव-राज की पकड़ कमजोर
महाराष्ट्र की राजनीतिक सरगर्मी के बीच 15 जनवरी को हुए 29 नगर निगमों के चुनावों के बाद शुक्रवार को मतों की गिनती की गई।...

महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव परिणाम: बीजेपी-महायुति का प्रचंड प्रदर्शन, उद्धव-राज की पकड़ कमजोर

महाराष्ट्र की राजनीतिक सरगर्मी के बीच 15 जनवरी को हुए 29 नगर निगमों के चुनावों के बाद शुक्रवार को मतों की गिनती की गई। राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, कुल 893 वार्डों में फैली 2,869 सीटों पर 15,931 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला हुआ। इस बार के चुनावों में मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुख्य आकर्षण का केंद्र रही, जहां लगभग 52.94% मतदान दर्ज किया गया। यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे लंबे समय बाद इस चुनावी समर में सक्रिय रूप से शामिल हुए।

महायुति (भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) और महाविकास आघाड़ी (उद्धव ठाकरे गुट और कांग्रेस) के बीच यह कड़ा मुकाबला आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा भी तय करने वाला माना जा रहा है। शुरुआती रुझानों और अंतिम परिणामों से यह स्पष्ट हो गया है कि महायुति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विपक्ष को पीछे छोड़ दिया है।

प्रमुख अपडेट्स और रुझान

  • भाजपा का दबदबा: रात 9:30 बजे तक के चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा ने 1372 सीटों पर अपनी बढ़त बनाए रखी। यह महायुति के लिए एक बड़ी जीत का संकेत है।
  • महायुति की प्रचंड जीत: कुल 29 नगर निगमों के रुझानों से पता चला कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन (महायुति) 1,200 से अधिक सीटों पर आगे चल रहा था।
  • विपक्ष की स्थिति: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) 158 सीटों पर, शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) 394, मनसे 12, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) 149 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) 36 सीटों पर आगे रही।

राष्ट्रीय नेताओं की प्रतिक्रिया

दिल्ली से, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों के रुझानों को "खुशी का दिन" बताया। उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों, राष्ट्रवाद और विकसित भारत के विजन का समर्थन किया है। उन्होंने दावा किया कि ये नतीजे उन ताकतों को जनता द्वारा नकारने को दिखाते हैं, जो "पाकिस्तान की धुन पर नाच रही हैं"। उन्होंने राहुल गांधी पर भी हार के बाद आत्ममंथन करने के बजाय बार-बार EVM, चुनावों और संस्थानों पर सवाल उठाने का आरोप लगाया।

महायुति की जीत सुनिश्चित होने के बाद, भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "NDA की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। मुंबई में हमारी जीत दर्शाती है कि युवाओं ने महायुति को जबरदस्त समर्थन दिया है।"

प्रमुख विजेता और हारने वाले

  • जालना में निर्दलीय की जीत: गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपी श्रीकांत पंगारकर ने जालना नगर निगम चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल कर जश्न मनाया।
  • न्यायिक हिरासत में जीत: सोलापुर से चौंकाने वाले नतीजों में, भाजपा उम्मीदवार शालन शिंदे ने बिना प्रचार किए, न्यायिक हिरासत में रहते हुए नगर निगम चुनाव जीत लिया। उन पर बालासाहेब सरवदे हत्याकांड का आरोप है।
  • कोल्हे परिवार की जीत: जलगांव से भावुक तस्वीरें सामने आईं, जहां सरिता कोल्हे को महायुति उम्मीदवार पीयूष ललित कोल्हे को गले लगाते और रोते हुए देखा गया। कोल्हे परिवार के तीन सदस्यों, ललित कोल्हे (जिन्होंने जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा), सिंधुताई कोल्हे और पीयूष ललित कोल्हे ने अपनी-अपनी सीटें जीतीं।
  • अरुण गवली की बेटी की हार: गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली की बेटी योगिता गवली बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव हार गईं, जो गवली परिवार की अगली पीढ़ी के लिए एक असफल चुनावी शुरुआत रही।
  • कांग्रेस की मुंबई में शुरुआती जीत: मुंबई के वार्ड 183 से कांग्रेस उम्मीदवार आशा काले ने जीत हासिल की, जबकि वार्ड 165 में अशरफ आज़मी ने नवाब मलिक के भाई कैप्टन मलिक प्रभात को हराया।
  • शिंदे गुट की मजबूत पकड़: वार्ड 163 में, शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की शैला लांडे (विधायक दिलीप लांडे की पत्नी) ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) उम्मीदवार संगीता सावंत को हराकर मुंबई में शिंदे गुट की पकड़ मजबूत की।

शहरवार स्थिति और महत्वपूर्ण मुकाबले

महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि शुरुआती रुझान भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति के पक्ष में एकतरफा मुकाबले का संकेत दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि महायुति 29 में से लगभग 28 नगर निगमों में नागरिक निकाय बनाने जा रही है।

नागपुर महानगरपालिका

नागपुर की सभी 151 सीटों के रुझानों में भाजपा 109 सीटों पर आगे चल रही थी। 2017 के पिछले चुनाव में भाजपा ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। वार्ड 3 से AIMIM के तीन उम्मीदवार भी शुरुआती राउंड में आगे रहे, जो शहर में ओवैसी की पार्टी के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

पुणे महानगरपालिका

पुणे में भाजपा 60 सीटों पर आगे चल रही थी, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) 7 और कांग्रेस 5 सीटों पर आगे थी। शरद पवार की एनसीपी के पूर्व शहर अध्यक्ष जगताप ने कांग्रेस में शामिल होकर पुणे नगर निगम चुनावों में पार्टी का खाता खोला।

मुंबई: ठाकरे की साख पर सवाल

एशिया की सबसे अमीर नगर निगम, BMC पर पिछले कई दशकों से शिवसेना का कब्जा रहा है, लेकिन पार्टी में विभाजन के बाद यह उद्धव ठाकरे के लिए साख की लड़ाई बन गई है। एक्जिट पोल्स में भाजपा और एकनाथ शिंदे के गठबंधन को बढ़त मिलती दिखी, जबकि उद्धव और राज ठाकरे की जोड़ी को 58 से 68 सीटें मिलने का अनुमान था।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के नेता सुनील शिंदे ने कहा कि नतीजे बालासाहेब ठाकरे, उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे से जुड़े इलाके में पार्टी की गहरी जड़ों को दिखाते हैं।

अन्य महत्वपूर्ण नगर निगम

  • कोल्हापुर: कांग्रेस 26 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि भाजपा 22 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही।
  • नवी मुंबई: भाजपा और शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना दोनों 27-27 सीटों पर कड़ी टक्कर में आगे चल रही थीं।
  • छत्रपति संभाजीनगर: AIMIM और शिवसेना के गुटों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। AIMIM और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) दोनों 5-5 सीटों पर आगे थे, जबकि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 6 सीटों के साथ थोड़ी आगे थी।
  • अहिल्यानगर, अमरावती, अकोला, नांदेड़: इन सभी क्षेत्रों में भी भाजपा ने शुरुआती बढ़त बनाए रखी।

शरद पवार गुट को झटका

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में शरद पवार की पार्टी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी - शरदचंद्र पवार गुट) का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। अब तक के रुझानों में पवार गुट के प्रत्याशी केवल 19 वार्डों में आगे चल रहे थे, जो सियासी तौर पर उनके लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

निष्कर्ष

महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों के परिणाम स्पष्ट रूप से महायुति के पक्ष में रहे हैं, जिससे राज्य की राजनीति में भाजपा और उसके सहयोगियों की पकड़ मजबूत हुई है। यह परिणाम न केवल स्थानीय निकायों के लिए बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत है, जो दर्शाता है कि मतदाताओं ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और राज्य में महायुति सरकार के कार्यों पर भरोसा जताया है। वहीं, उद्धव ठाकरे और शरद पवार के नेतृत्व वाले गुटों के लिए यह आत्ममंथन का समय है।