माघ मेला 2024: भीषण ठंड में भी प्रयागराज संगम पर श्रद्धालुओं का सैलाब - ताजा खबर
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश: देश के विभिन्न कोनों से आए लाखों श्रद्धालु इस समय प्रयागराज में चल रहे पवित्र माघ मेले 2024 में आस्था की डुबकी लगाने के लिए उमड़ पड़े हैं। भीषण कड़ाके की ठंड और बर्फीली हवाओं के बावजूद, भक्तों का उत्साह चरम पर है। संगम तट पर, जहां गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों का मिलन होता है, सुबह से ही हर-हर महादेव और जय गंगा मैया के जयघोष गूंज रहे हैं। यह दृश्य भक्तों की अटूट आस्था और भक्ति का अद्वितीय प्रमाण है।
क्यों खास है माघ मेला और पवित्र स्नान?
माघ मेला हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण वार्षिक आयोजनों में से एक है। हर साल माघ के महीने में आयोजित होने वाला यह मेला मोक्ष और पुण्य कमाने का एक बड़ा अवसर माना जाता है।
- पवित्र संगम स्नान: मान्यता है कि माघ महीने में संगम में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- कल्पवास: कई श्रद्धालु पूरे एक महीने तक कल्पवास करते हैं, जिसमें वे सात्विक जीवन जीते हुए ध्यान और तपस्या में लीन रहते हैं।
- धार्मिक महत्व: यह पर्व देवताओं द्वारा पृथ्वी पर आकर स्नान करने की पौराणिक कथाओं से भी जुड़ा है।
ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का अदम्य साहस
इस वर्ष माघ मेले पर शीतलहर का प्रकोप साफ दिख रहा है। सुबह के समय तापमान काफी नीचे गिर जाता है, जिससे हड्डियां गला देने वाली ठंड महसूस होती है। इसके बावजूद, श्रद्धालुओं की कतारें गंगा में पवित्र स्नान के लिए रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी एक समान भक्ति भाव से इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं। प्रशासन ने ठंड से बचाव के लिए कई इंतजाम किए हैं, लेकिन भक्तों की आस्था ही उनकी सबसे बड़ी ढाल बनी हुई है। यह लेटेस्ट अपडेट दर्शाता है कि भक्त अपनी श्रद्धा के आगे किसी भी बाधा को नहीं मानते।
मेले में व्यवस्थाएं और चुनौतियाँ
इतनी बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की गई हैं।
- स्नान घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम।
- अस्थायी अस्पताल और चिकित्सा शिविर।
- ठंड से बचाव के लिए अलाव और कंबल की व्यवस्था।
- स्वच्छता और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष टीमें।
हालांकि, बढ़ती भीड़ और ठंड दोनों ही प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। फिर भी, यह भव्य आयोजन भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की जीवंतता को दर्शाता है। यह एक ऐसा आध्यात्मिक अनुभव है जो हर साल लाखों लोगों को अपनी ओर खींचता है, चाहे मौसम कितना भी प्रतिकूल क्यों न हो।