भारतीय नोटों पर गांधी जी से पहले किसकी फोटो थी? जानें करेंसी का पूरा इतिहास और लेटेस्ट अपडेट!

भारतीय नोटों पर गांधी जी से पहले किसकी फोटो थी? जानें करेंसी का पूरा इतिहास और लेटेस्ट अपडेट!
आजकल भारतीय करेंसी नोटों पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर एक आम और जानी-पहचानी पहचान बन गई है। उनकी शांत छवि...
भारतीय नोटों पर गांधी जी से पहले किसकी फोटो थी? जानें करेंसी का पूरा इतिहास और लेटेस्ट अपडेट!

आजकल भारतीय करेंसी नोटों पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर एक आम और जानी-पहचानी पहचान बन गई है। उनकी शांत छवि हमें हर नोट पर देखने को मिलती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गांधी जी से पहले भारतीय नोटों पर किसकी तस्वीर छपी होती थी? यह सवाल कई लोगों के मन में उठता है। आइए, भारतीय नोटों के दिलचस्प इतिहास में गहराई से उतरते हैं और इस रहस्य से पर्दा उठाते हैं कि गांधी जी की तस्वीर से पहले हमारी करेंसी पर किन व्यक्तित्वों या प्रतीकों का राज था।

भारतीय नोटों पर छवियों का ऐतिहासिक सफर: ब्रिटिश काल से वर्तमान तक

गांधी जी की तस्वीर भारतीय नोटों पर आने से पहले, हमारी मुद्रा ने कई बदलाव देखे हैं। यह सफर ब्रिटिश शासन से शुरू होकर आजादी के बाद के शुरुआती दशकों तक फैला हुआ है।

ब्रिटिश भारत में नोटों पर तस्वीरें

जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, तब नोटों पर ब्रिटिश सम्राटों की तस्वीरें प्रमुखता से दिखाई देती थीं। इनमें मुख्य रूप से किंग जॉर्ज VI की तस्वीर होती थी, जो उस समय के भारतीय रुपये पर छपी होती थी। यह ब्रिटिश राज का प्रतीक था और उनकी संप्रभुता को दर्शाता था।

  • किंग जॉर्ज VI: ब्रिटिश भारत के अंतिम सम्राट जिनकी तस्वीर करेंसी पर थी।
  • अन्य ब्रिटिश सम्राट: इससे पहले भी विभिन्न ब्रिटिश शासकों की तस्वीरें समय-समय पर नोटों पर आती रही थीं।

आजादी के बाद: गांधी जी से पहले का दौर (1947-1969)

1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद, देश ने अपनी पहचान स्थापित करनी शुरू की। ब्रिटिश सम्राटों की तस्वीरों को हटाकर, भारतीय प्रतीकों और राष्ट्रीय महत्व की छवियों को नोटों पर जगह दी गई।

  1. अशोक स्तंभ और शेर की राजधानी: आजादी के तुरंत बाद, भारतीय नोटों पर अशोक स्तंभ के सिंह चतुर्मुख को प्रमुखता मिली। यह भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया था और यह शक्ति, साहस और विश्वास का प्रतीक है।
  2. कृषि और उद्योग से संबंधित चित्र: कुछ नोटों पर भारत के कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था को दर्शाने वाले चित्र, जैसे कि खेतों में काम करते किसान या उद्योगों से संबंधित दृश्य भी छपे होते थे। ये नए स्वतंत्र भारत की प्रगति और आत्मनिर्भरता की भावना को दर्शाते थे।
  3. ऐतिहासिक स्मारक: कुछ नोटों पर भारत के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक, जैसे कि गेटवे ऑफ इंडिया या कोणार्क सूर्य मंदिर के पहिये की तस्वीर भी देखने को मिलती थी।

यह वह दौर था जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी पहली नोट श्रृंखला जारी की, जिसमें ब्रिटिश राज के प्रतीकों को हटाकर भारतीय पहचान को स्थापित किया गया था।

महात्मा गांधी की तस्वीर का आगमन

महात्मा गांधी की तस्वीर पहली बार 1969 में भारतीय नोटों पर छपी थी। यह उनकी जन्म शताब्दी का वर्ष था। उस समय, 100 रुपये के नोट पर गांधी जी की बैठी हुई मुद्रा में तस्वीर छपी थी, जिसमें पीछे सेवाग्राम आश्रम का दृश्य था। हालांकि, गांधी जी की वर्तमान मुस्कुराती हुई तस्वीर, जिसे हम आज देखते हैं, 1996 में 'महात्मा गांधी श्रृंखला' के तहत सभी नोटों पर एक स्थायी विशेषता बन गई। इस श्रृंखला में सुरक्षा सुविधाओं को भी बढ़ाया गया था।

संक्षेप में, भारतीय नोटों पर गांधी जी से पहले ब्रिटिश सम्राटों और फिर आजादी के बाद अशोक स्तंभ, कृषि-उद्योग के दृश्यों और ऐतिहासिक स्मारकों की तस्वीरें थीं। गांधी जी की तस्वीर का आगमन भारतीय मुद्रा के एक नए युग का प्रतीक बना, जो आज भी कायम है। यह परिवर्तन भारत की स्वतंत्रता, संप्रभुता और राष्ट्रीय गौरव की यात्रा को दर्शाता है।

क्या भविष्य में नोटों पर कोई और तस्वीर आ सकती है?

समय-समय पर यह चर्चा उठती रहती है कि क्या नोटों पर गांधी जी के अलावा अन्य महान हस्तियों की तस्वीरें भी होनी चाहिए। हालाँकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल भारतीय करेंसी नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर ही एकमात्र स्थिर छवि बनी रहेगी। यह फैसला राष्ट्रपिता के अद्वितीय योगदान और वैश्विक पहचान को देखते हुए लिया गया है। भविष्य में नीतिगत बदलाव संभव हैं, लेकिन वर्तमान में गांधी जी ही हमारी मुद्रा की पहचान हैं।