आईआईटी कानपुर में एक और शोध छात्र की आत्महत्या ने खड़े किए गंभीर सवाल
देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान आईआईटी कानपुर एक बार फिर दुखद कारणों से चर्चा में है। संस्थान के भीतर मंगलवार को एक शोध छात्र ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली, जिससे पूरे परिसर में गहरा सदमा और आक्रोश फैल गया। यह घटना आईआईटी कानपुर में लगातार सामने आ रही आत्महत्याओं की श्रृंखला में नवीनतम है, जो छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति और संस्थान की आंतरिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। इस ताज़ा खबर ने एक बार फिर संस्थान के वातावरण और छात्रों पर पड़ने वाले दबाव की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
मानवाधिकार आयोग का हस्तक्षेप: आईआईटी कानपुर से मांगा जवाब
इस गंभीर मामले के बाद, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सक्रिय रूप से इसका संज्ञान लिया है। आयोग ने आईआईटी कानपुर प्रशासन से इस घटना पर विस्तृत रिपोर्ट और स्पष्टीकरण मांगा है। संस्थान को 22 जनवरी तक आयोग के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने इस नई आत्महत्या की घटना को दिसंबर में हुई एक अन्य आत्महत्या के मामले के साथ जोड़ दिया है। इसके अतिरिक्त, राम स्वरूप इश्राम की दुखद मृत्यु को भी इसी व्यापक जांच का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि आयोग इन घटनाओं की गहनता से जांच करने को लेकर कितना सख्त है।
छात्रों में भारी आक्रोश और संस्थान की जवाबदेही पर सवाल
संस्थान में लगातार घट रही ऐसी घटनाओं ने छात्रों के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी है। मंगलवार को हुई आत्महत्या के बाद, छात्रों ने अपनी चिंताओं और मांगों पर चर्चा करने के लिए तुरंत एक आम सभा (जनरल बॉडी मीटिंग) बुलाई।
डीन के आवास का घेराव और छात्रों की प्रमुख मांगें
छात्रों के अनुसार, स्टूडेंट्स एसोसिएशन के डीन इस महत्वपूर्ण बैठक में अनुपस्थित रहे, जिससे उनका गुस्सा और भड़क उठा। अपनी गहरी निराशा और असंतोष व्यक्त करने के लिए, नाराज छात्रों ने डीन के आवास के बाहर प्रदर्शन किया और उनका घेराव किया। छात्रों का आरोप है कि पिछले दो वर्षों के दौरान संस्थान में दुखद रूप से नौ छात्रों की मौत हो चुकी है, लेकिन संस्थान प्रबंधन ने इन गंभीर मुद्दों पर कोई प्रभावी या ठोस कार्रवाई नहीं की है। वे अब संस्थान से इन घटनाओं की जवाबदेही तय करने और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। यह स्थिति आईआईटी कानपुर में बढ़ते तनाव और छात्रों की बढ़ती हताशा को उजागर करती है।