धार भोजशाला विवाद: हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट में पेश की बड़ी दलील, ASI रिपोर्ट का दिया हवाला

धार भोजशाला विवाद: हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट में पेश की बड़ी दलील, ASI रिपोर्ट का दिया हवाला
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में सोमवार को धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर से जुड़े एक अहम मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिविजन बेंच के सामने हिंदू पक्ष ने जोरदार तर्क पेश करते हुए कहा कि यह स्मारक कभी मस्जिद नहीं था, बल्कि यह परमार राजा भो...

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में सोमवार को धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर से जुड़े एक अहम मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिविजन बेंच के सामने हिंदू पक्ष ने जोरदार तर्क पेश करते हुए कहा कि यह स्मारक कभी मस्जिद नहीं था, बल्कि यह परमार राजा भोज द्वारा निर्मित वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर है। हिंदू पक्ष ने अपने दावों के समर्थन में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें परिसर के अंदर मंदिर के अवशेषों और प्रतीकों की मौजूदगी का जिक्र है।

मुख्य बातें

  • हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट में दलील दी कि धार की भोजशाला मूल रूप से राजा भोज द्वारा बनवाया गया वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर है, न कि मस्जिद।
  • 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' के वकील विष्णु शंकर जैन ने ASI की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि मौजूदा ढांचा मंदिर के अवशेषों और स्तंभों का पुन: उपयोग करके बनाया गया है।
  • दलील में बताया गया कि परिसर में आज भी संस्कृत श्लोकों वाले शिलालेख, हवन कुंड, मंडप और देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां मौजूद हैं।
  • हिंदू पक्ष ने तर्क दिया कि ASI के नियमों के अनुसार किसी भी संरक्षित स्मारक का मूल धार्मिक स्वरूप नहीं बदला जा सकता, इसलिए यहां केवल हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलना चाहिए।
  • मुस्लिम पक्ष ने ASI सर्वेक्षण पर सवाल उठाए और हिंदू पक्ष द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
  • हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रखने का निर्देश दिया है, जिसमें अन्य पक्ष अपनी आपत्तियां प्रस्तुत कर सकेंगे।

अब तक क्या जानकारी है

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में सोमवार को धार भोजशाला मामले की सुनवाई के दौरान, हिंदू पक्ष ने अपनी मजबूत दलीलें प्रस्तुत कीं। 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' के वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट को बताया कि ASI की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि वर्तमान संरचना मंदिर के अवशेषों और स्तंभों का उपयोग करके निर्मित की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिसर के भीतर आज भी संस्कृत श्लोकों से युक्त शिलालेख, हवन कुंड, मंडप और हिंदू देवी-देवताओं की खंडित प्रतिमाएं मौजूद हैं। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह ढांचा 1034 ईस्वी में परमार राजा भोज ने बनवाया था और आक्रमणकारियों द्वारा प्रतीकों को मिटाने के प्रयासों के बावजूद इसका मूल धार्मिक स्वरूप आज भी बरकरार है। उनकी मुख्य दलील यह है कि ASI के नियमों के अनुसार, किसी भी संरक्षित स्मारक का मूल धार्मिक स्वरूप नहीं बदला जा सकता, इसलिए भोजशाला में केवल हिंदुओं को पूजा का अधिकार दिया जाना चाहिए।

लगभग दो घंटे तक चली सुनवाई के दौरान, मुस्लिम पक्ष के वकील ने हिंदू समुदाय की याचिका के समर्थन में प्रस्तुत सभी दस्तावेजों की प्रतियां उन्हें भी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। हाई कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मौखिक रूप से कहा कि दलीलें पूरी होने के बाद, इस मामले से जुड़े सभी पक्ष अपनी आपत्तियां पेश कर सकते हैं, जिन पर अदालत विचार करेगी। कोर्ट ने यह भी बताया कि सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।

उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट के निर्देश पर ASI ने दो साल पहले इस विवादित परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था और 2000 से अधिक पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान मस्जिद से पहले, धार के परमार राजाओं के शासनकाल का एक विशाल ढांचा वहां मौजूद था और मौजूदा विवादित ढांचा उसी मंदिर के हिस्सों का पुन: उपयोग करके बनाया गया है। मुस्लिम पक्ष ने ASI के सर्वेक्षण पर गंभीर सवाल उठाए हैं और हिंदू पक्ष के दावे को खारिज कर दिया है। उनका आरोप है कि ASI ने उनकी पिछली आपत्तियों को नजरअंदाज किया और सर्वेक्षण में परिसर के अंदर 'चोर दरवाजे से रखी गई चीजों' को भी शामिल कर लिया।

संदर्भ और पृष्ठभूमि

धार की भोजशाला मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक स्मारक है, जो सदियों से हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लिए आस्था और विवाद का केंद्र रही है। हिंदू समुदाय इसे मां सरस्वती (वाग्देवी) का प्राचीन मंदिर मानता है, जिसका निर्माण 11वीं शताब्दी में महान परमार राजा भोज ने करवाया था। राजा भोज एक विद्वान शासक थे और कला, साहित्य तथा शिक्षा के महान संरक्षक थे। उनके शासनकाल में मालवा क्षेत्र ज्ञान और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। "भोजशाला" नाम ही राजा भोज और "शाला" (विद्यालय या अध्ययन कक्ष) से जुड़ा है, जो इसके शैक्षिक महत्व को दर्शाता है।

दूसरी ओर, मुस्लिम समुदाय इस परिसर को कमाल मौला मस्जिद मानता है और यहां शुक्रवार को नमाज अदा करता है। यह विवाद कई दशकों से चला आ रहा है और विभिन्न अदालती प्रक्रियाओं तथा कानूनी लड़ाइयों से गुजरा है। इस स्थल पर मालिकाना हक और धार्मिक अधिकारों को लेकर दोनों पक्षों के बीच लगातार तनाव बना रहता है।

वर्तमान में, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश के अनुसार, हिंदुओं को हर मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज अदा करने की इजाजत है। यह व्यवस्था एक संतुलन बनाने का प्रयास करती है, लेकिन दोनों समुदाय अपने-अपने दावों पर कायम हैं और पूर्ण धार्मिक अधिकार चाहते हैं। ASI एक सरकारी संस्था है जो भारत में ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण और अनुसंधान का काम करती है। उसकी रिपोर्टों को कानूनी मामलों में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। इस मामले में ASI की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह परिसर की संरचना और उसमें पाए गए पुरातात्विक साक्ष्यों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जो विवाद के निपटारे में निर्णायक हो सकती है। परमार राजाओं ने 9वीं शताब्दी से लेकर लगभग 400 वर्षों तक मध्य-पश्चिमी भारत के मालवा और आसपास के बड़े क्षेत्र पर शासन किया था, और उनके द्वारा निर्मित कई स्मारक आज भी इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं।

आगे क्या होगा

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रखेगी। इस दौरान, मुस्लिम पक्ष सहित मामले से जुड़े अन्य पक्ष अपनी आपत्तियां और दलीलें प्रस्तुत कर सकते हैं। कोर्ट ने मौखिक रूप से यह भी कहा है कि सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद, वह उन आपत्तियों पर विचार करेगा जिन्हें प्रस्तुत किया जाएगा। इस मामले में अगली सुनवाईयों के दौरान दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले अतिरिक्त साक्ष्य और कानूनी तर्कों पर न्यायालय की कार्यवाही केंद्रित रहेगी। उम्मीद है कि अदालत सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय देगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • भोजशाला विवाद क्या है?
    धार की भोजशाला एक ऐतिहासिक परिसर है जिसे हिंदू समुदाय मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। दोनों पक्ष इसके धार्मिक स्वरूप और पूजा/इबादत के अधिकारों को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
  • ASI की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
    ASI की 2000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान ढांचा मंदिर के अवशेषों और स्तंभों का उपयोग करके बनाया गया है, और मस्जिद से पहले वहां परमार राजाओं के शासनकाल का एक विशाल ढांचा मौजूद था।
  • वर्तमान में भोजशाला में पूजा-इबादत की क्या व्यवस्था है?
    ASI के 2003 के आदेश के अनुसार, हिंदुओं को हर मंगलवार को पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज पढ़ने की इजाजत है।
  • हिंदू पक्ष का मुख्य तर्क क्या है?
    हिंदू पक्ष का तर्क है कि भोजशाला मूल रूप से राजा भोज द्वारा निर्मित सरस्वती मंदिर है, और ASI रिपोर्ट में भी मंदिर के अवशेषों की पुष्टि हुई है। वे ASI नियमों का हवाला देते हुए केवल हिंदुओं को पूजा का अधिकार देने की मांग कर रहे हैं।
  • हाईकोर्ट में अगली सुनवाई कब है?
    हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रखने का निर्देश दिया है, जिसमें अन्य पक्ष अपनी आपत्तियां प्रस्तुत कर सकते हैं।