दरभंगा एम्स लेटेस्ट अपडेट: 10 साल में सिर्फ मुख्य गेट बना, कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा
बिहार के दरभंगा में प्रस्तावित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निर्माण कार्य में हो रही देरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस का दावा है कि घोषणा के 10 साल बाद भी दरभंगा एम्स की ज़मीन पर केवल मुख्य गेट के कुछ पिलर ही खड़े हो पाए हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस का आरोप: 10 साल में सिर्फ गेट का पिलर
कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर दरभंगा एम्स के कथित मुख्य गेट के पिलर की तस्वीर साझा की है। पार्टी का आरोप है कि इतने वर्षों बाद भी परियोजना की ज़मीनी हकीकत सिर्फ एक गेट तक सीमित है, जबकि सरकार ने दावा किया था कि यहाँ इलाज शुरू हो चुका है। कांग्रेस ने इन सरकारी दावों को पूरी तरह से निराधार और झूठा बताया है।
पीएम मोदी के दावों पर असित नाथ तिवारी का पलटवार
कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री लगातार गलत जानकारी देते रहे हैं, और दरभंगा एम्स इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने कई मंचों से यह दावा किया कि दरभंगा एम्स में उपचार चल रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि वहाँ केवल एक अधूरा गेट ही खड़ा है। कांग्रेस ने आज इस सच्चाई को जनता के सामने उजागर कर दिया है।" गौरतलब है कि इससे पहले बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी प्रधानमंत्री के दरभंगा एम्स संबंधी बयानों पर सवाल उठाए थे।
स्वास्थ्य जैसी बुनियादी ज़रूरत पर राजनीति: स्थानीय लोगों और छात्रों में आक्रोश
तिवारी ने केंद्र सरकार पर मिथिला क्षेत्र की जनता को केवल खोखले वादों से बहलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जैसी अत्यंत बुनियादी ज़रूरत पर भी राजनीति की जा रही है। दरभंगा एम्स के निर्माण में देरी को लेकर स्थानीय निवासियों में भी गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है।
- स्थानीय निवासी अविनाश भारद्वाज ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा, "पूरे 10 साल बीत गए और एम्स का सिर्फ गेट ही बन पाया है। दरभंगा में भाजपा के ही सांसद और विधायक हैं, फिर भी काम आगे नहीं बढ़ रहा। ऐसा लगता है कि एम्स के पूरी तरह बनने में शायद अगले 10 साल और लग जाएँगे।"
- मिथिला स्टूडेंट यूनियन के नेता गोपाल चौधरी ने सरकार पर लोगों के स्वास्थ्य का मज़ाक बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "10 साल बाद भी सच्चाई यही है कि दरभंगा एम्स में केवल एक गेट तैयार हुआ है। सरकार जानबूझकर एम्स परियोजना को लटकाए रखना चाहती है। यह मिथिला के लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।" गोपाल चौधरी ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही एम्स का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो छात्र और युवा आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
दरभंगा एम्स: घोषणा से निर्माण तक का सफर
यह महत्वपूर्ण है कि बिहार में पटना के बाद दरभंगा दूसरा एम्स है। केंद्र सरकार ने फरवरी 2015 में दरभंगा में एम्स बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद, 2020 में इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से पारित किया गया था। इस एम्स का निर्माण 187 एकड़ भूमि पर होना है और इसकी अनुमानित लागत 1264 करोड़ रुपये बताई गई थी। हालाँकि, परियोजना की धीमी प्रगति ने जनता और विपक्षी दलों के बीच चिंता और रोष पैदा कर दिया है।