अंकिता भंडारी हत्याकांड: CBI जांच के ऐलान पर पिता की नाराजगी और 'वीआईपी' कनेक्शन पर नई बहस
उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद, एक ऑडियो क्लिप सामने आई है जिसने नई बहस छेड़ दी है। इस क्लिप में अंकिता के पिता, वीरेंद्र भंडारी, राज्य आंदोलनकारी कमला पंत से बातचीत करते हुए 'वीआईपी' एंगल को लेकर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। यह ऑडियो उस समय का बताया जा रहा है जब शुक्रवार शाम को मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच की घोषणा की थी।
पिता वीरेंद्र भंडारी का 'वीआईपी' पर असंतोष
ऑडियो बातचीत के दौरान, जब कमला पंत ने वीरेंद्र भंडारी से मुख्यमंत्री की सीबीआई जांच की घोषणा के बारे में पूछा, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह उनकी मूल मांग के अनुरूप नहीं है। वीरेंद्र भंडारी ने जोर देकर कहा कि उनकी मांग थी कि 'वीआईपी' को पकड़ने के लिए सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस संबंध में एक विस्तृत मांग पत्र भी सौंपा था। लेकिन, मुख्यमंत्री ने केवल इतना ही कहा कि अंकिता भंडारी केस की जांच सीबीआई को सौंपी जाएगी और 'वीआईपी' के बारे में कोई स्पष्ट बात नहीं कही। वीरेंद्र भंडारी की बातों से उस 'वीआईपी' को लेकर उनका असंतोष स्पष्ट झलकता है, जिसका नाम इस मामले की शुरुआत से ही चर्चा में रहा है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड: एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि
अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या 18 सितंबर 2022 को हुई थी और उनका शव 24 सितंबर को बरामद किया गया था। इस मामले में तीन मुख्य आरोपी - पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर - को मई 2025 में निचली अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। यह फैसला घटना के लगभग तीन साल चार महीने बाद आया था।
मुख्यमंत्री धामी का न्याय सुनिश्चित करने का दावा
सीबीआई जांच की संस्तुति करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार का प्राथमिक लक्ष्य शुरू से ही निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रहा है। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। इस SIT ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया और प्रभावी कानूनी पैरवी के कारण किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिल सकी। SIT की जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया गया और अंततः दोषियों को निचली अदालत से उम्रकैद की सजा मिली। मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आई कुछ ऑडियो क्लिप्स के संबंध में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं और उनकी जांच चल रही है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल: 'वीआईपी' कौन?
मुख्यमंत्री के सीबीआई जांच के फैसले पर विपक्षी दल कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि केवल सीबीआई जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि देश को यह जानने का अधिकार है कि वह 'वीआईपी' कौन था, और उस रात किसके आदेश पर बुलडोजर चलाया गया था। कांग्रेस ने इस मामले में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।