भारत-अमेरिका व्यापार: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद टैरिफ पर बड़ा अपडेट

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भारत-अमेरिका व्यापार: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद टैरिफ पर बड़ा अपडेट
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के दौरान टैरिफ (आयात शुल्क) को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल ...

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत को कितना टैरिफ देना होगा?

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के दौरान टैरिफ (आयात शुल्क) को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने दुनिया भर में व्यापार युद्ध (Trade War) जैसी स्थितियां उत्पन्न कीं, चाहे वह रूसी तेल की खरीद का मुद्दा हो या रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के प्रयास। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने इस अमेरिकी टैरिफ नीति के माध्यम से कई वैश्विक संघर्षों को भी रोका। अब जबकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए कुछ टैरिफ को 'गैरकानूनी' घोषित कर दिया है और ट्रंप ने 10% वैश्विक टैरिफ की घोषणा की है, तो भारत पर लगने वाले आयात शुल्क को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। क्या यह 18% रहेगा, 10% होगा या फिर 13.5%? आइए इस जटिल स्थिति को समझते हैं।

भारत पर अमेरिकी टैरिफ का उतार-चढ़ाव भरा इतिहास

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा व्यापक टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद, भारत को अपने अमेरिकी निर्यात पर कितना शुल्क देना होगा, यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है। भारत पर अमेरिकी टैरिफ की दरें पहले भी बदलती रही हैं।

  • शुरुआती चरण: पिछले साल अप्रैल में, जब डोनाल्ड ट्रंप ने 'टैरिफ अटैक' की शुरुआत की थी, तो भारत पर 25% का पारस्परिक टैरिफ लगाया गया था।
  • बढ़ोतरी और तनाव: इसके बाद, अगस्त में ट्रंप ने अचानक भारत पर लागू टैरिफ को दोगुना करते हुए 50% कर दिया। इसके पीछे मुख्य कारण भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को बताया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि रूसी तेल खरीद से यूक्रेन युद्ध में रूस को मदद मिल रही है, जिसके लिए भारत पर अतिरिक्त 25% शुल्क लगाया गया।
  • व्यापार समझौता और कमी: 50% टैरिफ लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत भी रुक गई थी। हालांकि, हाल ही में दोनों देशों के बीच सहमति बनी और ट्रंप ने टैरिफ को 50% से घटाकर सीधे 18% कर दिया। ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद कर देगा, जिसके बाद उन्होंने अतिरिक्त 25% टैरिफ समाप्त कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और नई चुनौतियाँ

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए 'पारस्परिक टैरिफ' को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ट्रंप लगभग 50 साल पुराने अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) का उपयोग करते हुए शांति काल में ऐसे टैरिफ नहीं लगा सकते। इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत को अब 18% या 10% टैरिफ देना होगा, या फिर यह 13.5% होगा?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, भारत पर लगाए गए 18% के पारस्परिक टैरिफ का कानूनी आधार प्रभावी रूप से समाप्त हो जाता है। यदि 18% टैरिफ रद्द हो जाता है, तो भारत पर अमेरिकी टैरिफ घटकर केवल 3.5% रह जाता है। यह वही दर है जो ट्रंप के फैसलों से पहले भारत को 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) का दर्जा प्राप्त होने के कारण चुकानी पड़ती थी।

10% वैश्विक टैरिफ और 13.5% का गणित

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज ट्रंप ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए धारा 122 का उपयोग करके 10% वैश्विक टैरिफ लागू करने की घोषणा की है। यह नया टैरिफ रद्द किए गए टैरिफ की जगह लेगा। ऐसे में, यदि 3.5% की मूल दर में यह 10% का अतिरिक्त टैरिफ जोड़ दिया जाए, तो भारत पर लगने वाला कुल अमेरिकी टैरिफ 13.5% हो जाता है

ट्रंप का बयान बनाम व्हाइट हाउस की स्थिति

डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट में मिली हार के बाद जिस धारा 122 का इस्तेमाल करते हुए 10% वैश्विक टैरिफ लागू किया है, वह अमेरिकी राष्ट्रपति को 150 दिनों के लिए 15% तक का शुल्क लगाने का अधिकार देती है, लेकिन इस समय-सीमा के बाद उन्हें कांग्रेस की मंजूरी लेनी होती है।

भारत के संदर्भ में, ट्रंप ने एक बयान में कहा था कि भारत पर टैरिफ पहले से तय व्यापार समझौते के अनुसार 18% ही रहेगा। हालांकि, उनके इस दावे पर व्हाइट हाउस ने बाद में स्पष्ट किया कि कानूनी तौर पर फिलहाल भारत पर 10% टैरिफ लगाया जाएगा। यह विरोधाभास स्थिति को और भी जटिल बना रहा है, और भारत सरकार के लिए यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि वास्तव में कौन सी दर लागू होगी।