तेल अवीव में युद्ध के बीच अल-बहर मस्जिद: शांति और सह-अस्तित्व की एक अनूठी कहानी

तेल अवीव में युद्ध के बीच अल-बहर मस्जिद: शांति और सह-अस्तित्व की एक अनूठी कहानी
इजरायल की राजधानी तेल अवीव में एक आम शनिवार का दिन अचानक युद्ध के सायरन से बदल गया। समुद्र तट पर छुट्टियां मना रहे लोग, जो कुछ ही देर पहले धूप सेंक रहे थे और खेल कूद में मशगूल थे, मिसाइल हमलों की चेतावनी पर तुरंत बंकरों की ओर दौड़ पड़े। इसी अफरा-तफरी के बीच, एक पत्रकार ने शहर के बीचों-बीच स्थित एक प...

इजरायल की राजधानी तेल अवीव में एक आम शनिवार का दिन अचानक युद्ध के सायरन से बदल गया। समुद्र तट पर छुट्टियां मना रहे लोग, जो कुछ ही देर पहले धूप सेंक रहे थे और खेल कूद में मशगूल थे, मिसाइल हमलों की चेतावनी पर तुरंत बंकरों की ओर दौड़ पड़े। इसी अफरा-तफरी के बीच, एक पत्रकार ने शहर के बीचों-बीच स्थित एक प्राचीन मस्जिद से असर (शाम) की नमाज़ के लिए अज़ान की आवाज़ सुनी, जो युद्धग्रस्त माहौल में भी शांति और आस्था का एक अनूठा दृश्य प्रस्तुत कर रही थी। यह दृश्य एक ऐसे देश में सामने आया है, जहाँ दशकों से मुस्लिम राष्ट्रों के साथ संघर्ष चल रहा है, लेकिन जहाँ एक बड़ी मुस्लिम आबादी भी सह-अस्तित्व में रहती है।

मुख्य बातें

  • तेल अवीव में एक शांत शनिवार का माहौल अचानक मिसाइल अलर्ट और सायरन की आवाज़ से युद्धग्रस्त हो गया, जिससे लोग बंकरों की ओर भागने लगे।
  • इसी अफरा-तफरी के बीच, एक पत्रकार ने शहर के ऐतिहासिक जाफा क्षेत्र में स्थित अल-बहर मस्जिद से अज़ान की आवाज़ सुनी, जो आस्था और शांति का प्रतीक बनी रही।
  • लगभग 350 साल पुरानी अल-बहर मस्जिद का निर्माण 1675 में ऑटोमन साम्राज्य के दौरान मछुआरों और नाविकों के लिए किया गया था, और यह आज भी जाफा के समृद्ध इतिहास का हिस्सा है।
  • इजरायल की कुल आबादी का लगभग 18 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय से है, जो मुख्य रूप से अरब मूल के हैं और पीढ़ियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं।
  • यह घटना इस बात पर प्रकाश डालती है कि धार्मिक और राजनीतिक संघर्षों के बावजूद, इजरायल में विभिन्न धर्मों के लोग, जिनमें मुस्लिम भी शामिल हैं, एक साथ रहते हैं और अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं।
  • यह रिपोर्ट युद्ध के बीच मानवीय एकजुटता और साझा अनुभवों को रेखांकित करती है, जहाँ शेल्टरों में हर धर्म के लोग एक साथ शरण लेते हैं।

अब तक क्या जानकारी है

शनिवार को तेल अवीव के समुद्र तट पर लोग सामान्य रूप से अपनी छुट्टियां मना रहे थे, लेकिन अचानक मोबाइल पर अलर्ट और फिर सायरन बजने से स्थिति बदल गई। लोगों ने तुरंत समुद्र से निकलकर और बीच से उठकर बच्चों और सामान के साथ बंकरों की ओर दौड़ लगाई, जिससे कुछ ही पलों में चहल-पहल वाला इलाका सुनसान हो गया। इसी भागदौड़ के बीच, पत्रकार ने पीले पत्थरों से बनी एक मस्जिद से शाम की नमाज़ के लिए अज़ान सुनी। यह मस्जिद तेल अवीव की ऊंची इमारतों के बीच स्थित है और इसे ‘अल-बहर मस्जिद’ के नाम से जाना जाता है।

अल-बहर मस्जिद समुद्र से कुछ ही कदम की दूरी पर स्थित है और यह नए तेल अवीव और ऐतिहासिक जाफा शहर की सीमा पर पड़ती है। जाफा एक प्राचीन शहर है जिसका उल्लेख बाइबिल में भी मिलता है और यह स्कॉटिश चर्च, सिनेगॉग (यहूदी पूजा स्थल) और मस्जिदों के सह-अस्तित्व के लिए जाना जाता है। इस शहर में अधिकांश आबादी मुस्लिम है, लेकिन यहूदी और ईसाई समुदाय के लोग भी यहाँ निवास करते हैं। अल-बहर मस्जिद लगभग 350 साल पहले 1675 में ऑटोमन साम्राज्य के दौरान बनाई गई थी। इसे विशेष रूप से जाफा के बंदरगाह पर काम करने वाले मछुआरों और नाविकों के लिए बनाया गया था। मस्जिद के मेहराब और दरवाज़े के पास पत्थर पर उकेरी गई जानकारी के अनुसार, इसका निर्माण धनी अजा परिवार ने करवाया था। इसकी ऊंची मीनार ऑटोमन वास्तुकला की गवाही देती है।

मस्जिद के भीतर पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग वज़ू (नमाज़ से पहले की जाने वाली पवित्रता) की जगहें हैं। मस्जिद की साफ-सफाई, रंग-बिरंगे गुलाब के पौधे और विशाल हॉल में बिछे सुंदर कालीन इसकी अच्छी साज-संभाल को दर्शाते हैं। नमाज़ पढ़कर लौट रहे अदेल करीमी नामक 34 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि मस्जिद का नवीनीकरण और पुनर्निर्माण 1995-1997 के बीच किया गया था और तब से इसकी पूरी देखरेख की जाती है। इजरायल के सेंट्रल ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स के अनुसार, 2024 के अंत तक देश में मुस्लिम आबादी लगभग 18 लाख 9 हजार के करीब थी, जो कुल आबादी का करीब 18 प्रतिशत है। ये मुस्लिम आबादी मुख्य रूप से अरब मूल की है, जो पीढ़ियों से इस क्षेत्र में रह रही है।

संदर्भ और पृष्ठभूमि

इजरायल का इतिहास मुस्लिम मुल्कों के साथ कई संघर्षों से भरा रहा है। ईरान की इस्लामिक सत्ता के साथ इसकी जंग चल रही है, और गाजा से लेकर लेबनान और सीरिया में मुस्लिम आबादी के खिलाफ सैन्य अभियानों और मानवाधिकार उल्लंघनों के गंभीर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में, तेल अवीव जैसे प्रमुख इजरायली शहर में एक सक्रिय और सुव्यवस्थित मस्जिद की उपस्थिति, और वहाँ मुस्लिम समुदाय द्वारा निर्बाध रूप से इबादत करना, एक महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू को उजागर करता है। यह इस धारणा को चुनौती देता है कि संघर्ष पूरी तरह से धार्मिक विभाजन पर आधारित है।

जाफा शहर का ऐतिहासिक महत्व अत्यंत गहरा है। बाइबिल में इसका उल्लेख मिलता है, और यह हजारों वर्षों से विभिन्न सभ्यताओं और धर्मों का संगम रहा है। यहाँ यहूदी, ईसाई और मुस्लिम समुदाय के लोग सदियों से साथ रहते आए हैं। अल-बहर मस्जिद का निर्माण ऑटोमन साम्राज्य के दौरान हुआ था, जो इस क्षेत्र पर कई सदियों तक शासन करने वाली एक शक्तिशाली इस्लामिक सत्ता थी। यह मस्जिद उस दौर की विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और जाफा के बहुसांस्कृतिक इतिहास की पहचान है। इसका नाम 'अल-बहर' अरबी में 'समुद्र किनारे' का अर्थ है, जो इसकी भौगोलिक स्थिति को भी दर्शाता है।

यह रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि धार्मिक और राजनीतिक सत्ता की रस्साकशी के बावजूद, जमीनी स्तर पर मानवीय संबंध और सह-अस्तित्व बना रहता है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सरकार का समर्थन करने वालों में इजरायल की यूनाइटेड अरब पार्टी के मंसूर अब्बास जैसे मुस्लिम नेता भी शामिल हैं। इसी तरह, इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) में लेफ्टिनेंट कर्नल एल्ला वावेया जैसी मुस्लिम महिला अधिकारी भी हैं, जो सेना में सक्रिय रूप से सेवा दे रही हैं। यह दर्शाता है कि इजरायल के भीतर मुस्लिम समुदाय के लोग न केवल अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन कर रहे हैं, बल्कि देश की राजनीतिक और सैन्य संरचनाओं में भी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। मिसाइल हमलों में चाहे कफिर कासिम हो या जाफा, टूटने वाले घर मुसलमानों के भी होते हैं और यहूदियों के भी। सायरन की आवाज़ पर दौड़ लगाने वालों और शेल्टर में रात गुजारने वालों में हर मजहब के बच्चे, बूढ़े और जवान शामिल होते हैं, जो संघर्ष के मानवीय पहलू को उजागर करता है। यह साझा दुख और सुरक्षा की तलाश, धार्मिक या जातीय पहचान से परे, सभी को एकजुट करती है।

आगे क्या होगा

इजरायल में भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। ऐसे में, तेल अवीव और अन्य शहरों में मिसाइल अलर्ट और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता बनी रहेगी। हालांकि, अल-बहर मस्जिद जैसी संरचनाओं का अस्तित्व और मुस्लिम समुदाय की निरंतर धार्मिक गतिविधियाँ यह दर्शाती हैं कि जीवन और आस्था अपने रास्ते तलाश लेते हैं। यह मस्जिद जाफा के बहुधार्मिक ताने-बाने और इजरायल के भीतर मुस्लिम आबादी की दृढ़ता का प्रतीक बनी रहेगी।

संघर्षों के बीच भी, विभिन्न समुदायों के बीच सह-अस्तित्व और मानवीय संपर्क के उदाहरण सामने आते रहेंगे। शेल्टरों में एक साथ शरण लेने वाले लोग, चाहे वे किसी भी धर्म के हों, यह दिखाते हैं कि संकट के समय साझा मानवता की भावना प्रबल होती है। इजरायल में मुस्लिम नेताओं और सैनिकों की उपस्थिति भी यह संकेत देती है कि भविष्य में भी देश के भीतर विभिन्न समुदायों की भागीदारी बनी रहेगी, जो धार्मिक और राजनीतिक विभाजनों को चुनौती देती है। यह निरंतरता, एक जटिल और अक्सर विभाजित दुनिया में, उम्मीद और लचीलेपन का एक महत्वपूर्ण संदेश देती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • प्रश्न: तेल अवीव में अल-बहर मस्जिद क्यों खास है?
    उत्तर: यह युद्ध के समय में भी मुस्लिम समुदाय की आस्था और इजरायल की धार्मिक विविधता को दर्शाती है, जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग सह-अस्तित्व में रहते हैं।
  • प्रश्न: अल-बहर मस्जिद कितनी पुरानी है?
    उत्तर: यह लगभग 350 साल पुरानी है, जिसका निर्माण 1675 में ऑटोमन साम्राज्य के दौरान मछुआरों और नाविकों के लिए किया गया था।
  • प्रश्न: क्या इजरायल में मुस्लिम आबादी है?
    उत्तर: हाँ, इजरायल की कुल आबादी का लगभग 18% मुस्लिम हैं, जो मुख्य रूप से अरब मूल के हैं और पीढ़ियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं।
  • प्रश्न: जाफा शहर का क्या महत्व है?
    उत्तर: जाफा एक ऐतिहासिक शहर है जिसका उल्लेख बाइबिल में भी है। यह मुस्लिम, यहूदी और ईसाई समुदायों के सह-अस्तित्व का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।
  • प्रश्न: युद्ध के दौरान तेल अवीव में लोग कैसे प्रतिक्रिया देते हैं?
    उत्तर: मिसाइल अलर्ट बजने पर लोग तुरंत सुरक्षित बंकरों की ओर दौड़ते हैं, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या पृष्ठभूमि के हों, जो साझा मानवीय प्रतिक्रिया को दर्शाता है।