ताज़ा खबर: पाकिस्तान गहरे संकट में, अफगानिस्तान युद्ध और BLA हमलों से पाक सेना पर भारी दबाव!

ताज़ा खबर: पाकिस्तान गहरे संकट में, अफगानिस्तान युद्ध और BLA हमलों से पाक सेना पर भारी दबाव!
पाकिस्तान इस वक्त कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक तरफ अफगानिस्तान से सीधा सैन्य टकराव शुरू हो गया है, तो द...

पाकिस्तान पर दोहरी मार: अफगानिस्तान युद्ध और बलूचिस्तान में BLA के हमले

पाकिस्तान इस वक्त कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक तरफ अफगानिस्तान से सीधा सैन्य टकराव शुरू हो गया है, तो दूसरी ओर बलूचिस्तान में बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या ये दोहरे संकट पाकिस्तान को अंदर से कमजोर कर देंगे? पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर की फौज पहले से ही थकी हुई और दबाव में है।

अफगानिस्तान से बढ़ती तनातनी: एक नई जंग की शुरुआत

अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान का मौजूदा सैन्य टकराव बेहद चिंताजनक है। 21 फरवरी 2026 को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार, पक्तिया और खोस्त प्रांतों में कई हवाई हमले किए। पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकी अफगानिस्तान की ज़मीन से पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं। इसके जवाब में, 26-27 फरवरी को अफगान लड़ाकों ने पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर जवाबी हमले किए।

अफगानिस्तान ने दावा किया कि इन हमलों में उसके 40 से ज़्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कई सीमा चौकियों पर कब्जा कर लिया गया। इसके बाद पाकिस्तान ने काबुल और कंधार में फिर से बमबारी की। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब अफगानिस्तान के साथ "खुले युद्ध" की स्थिति में हैं। यह संघर्ष केवल सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि पाकिस्तान को रोज़ाना गोलीबारी और मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ रहा है।

बलूचिस्तान में बीएलए का बढ़ता कहर: पाक सेना की मुश्किलें

पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत, बलूचिस्तान, लंबे समय से अशांति का गढ़ रहा है। यहां बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) कई वर्षों से अलगाववादी आंदोलन चला रही है। जनवरी-फरवरी 2026 में बीएलए ने अपने सबसे बड़े और समन्वित हमलों को अंजाम दिया। पुलिस थानों, बैंकों, सैन्य ठिकानों और रिहायशी इलाकों को एक साथ निशाना बनाया गया। इन हमलों में 30 से अधिक नागरिक और सैनिक मारे गए। पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई में 200 से ज़्यादा बीएलए लड़ाकों को मार गिराने का दावा किया, लेकिन बीएलए के हमले लगातार जारी हैं। नतीजतन, सेना को अब बलूचिस्तान में चौबीसों घंटे हाई अलर्ट पर रहना पड़ रहा है, जिससे सैनिकों में थकान और संसाधनों (हथियार व धन) की कमी साफ दिख रही है।

दोहरे संकट से पाकिस्तान को संभावित खतरे

  • सेना पर बढ़ता दबाव: पाक सेना को दो अलग-अलग मोर्चों पर अपनी ताकत बांटनी पड़ रही है। एक ओर अफगानिस्तान के साथ 2600 किलोमीटर लंबी सीमा पर सैनिकों की तैनाती है, तो दूसरी ओर बलूचिस्तान में भी हजारों सैनिक तैनात हैं। इससे सेना की क्षमता प्रभावित हो रही है।
  • भारी आर्थिक बोझ: लगातार हवाई हमले, बमबारी और मिसाइलों का उपयोग बेहद महंगा है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है और उसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से लगातार कर्ज लेना पड़ रहा है। यह सैन्य खर्च देश की वित्तीय स्थिति को और बिगाड़ रहा है।
  • आंतरिक विद्रोह में वृद्धि: बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है। इसके अलावा, टीटीपी भी पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा जैसे प्रांतों में हमले कर रही है। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो सैनिकों में थकान और भगोड़ों की संख्या बढ़ सकती है।
  • भारत से तनाव का खतरा: भारत के साथ भी पाकिस्तान के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। यदि किसी भी कारणवश कोई चौथा मोर्चा खुलता है, तो पाकिस्तान की स्थिति और भी विकट हो सकती है।

विशेषज्ञों की राय: क्या है पाकिस्तान का भविष्य?

पाकिस्तानी और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि फिलहाल पाकिस्तान के टूटने का सीधा खतरा नहीं है। हालांकि, उनका मानना है कि यदि यह संघर्ष अगले 2-3 महीने तक जारी रहता है, तो देश के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। अमेरिका और चीन दोनों ने शांति बनाए रखने की अपील की है। यहां तक कि पाकिस्तान का सबसे करीबी दोस्त चीन भी उसे सलाह दे रहा है कि वह युद्ध को रोके और अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने पर ध्यान दे।

वर्तमान स्थिति और आगे की चुनौतियां

वर्तमान में, अफगानिस्तान सीमा पर भीषण गोलीबारी जारी है। बलूचिस्तान में सैन्य अभियान चल रहे हैं, लेकिन बीएलए के हमलों में कोई कमी नहीं आई है। सेना प्रमुख आसिम मुनीर लगातार बैठकें कर रहे हैं, पर इस जटिल समस्या का कोई आसान समाधान नज़र नहीं आ रहा। अफगानिस्तान के साथ यह युद्ध पाकिस्तान के लिए एक बड़ा खतरा है और बीएलए के हमलों ने पाक सेना को पहले ही थका दिया है। यदि ये दोनों संकट एक साथ बढ़ते हैं, तो पाकिस्तान की सेना, उसकी अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय एकता पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, अभी देश के पूरी तरह से टूट जाने जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन भविष्य में गंभीर परिणामों की आशंका बनी हुई है।