ब्रेकिंग न्यूज़: नल्ली निहारी का 300 साल पुराना रहस्य! पुरानी दिल्ली की शाही रेसिपी और बनाने की विधि

ब्रेकिंग न्यूज़: नल्ली निहारी का 300 साल पुराना रहस्य! पुरानी दिल्ली की शाही रेसिपी और बनाने की विधि
पुरानी दिल्ली की संकरी गलियाँ अपनी अनूठी मसालों की खुशबू और ऐतिहासिक व्यंजनों के लिए जानी जाती हैं। यदि आप खाने के...

पुरानी दिल्ली की संकरी गलियाँ अपनी अनूठी मसालों की खुशबू और ऐतिहासिक व्यंजनों के लिए जानी जाती हैं। यदि आप खाने के शौकीन हैं, तो आपने 'नल्ली निहारी' का नाम अवश्य सुना होगा। यह केवल एक भोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी एक पाक परंपरा है जो मुगल काल से चली आ रही है। सुबह-सुबह जामा मस्जिद के पास जब निहारी की देग (बड़ा बर्तन) खुलती है, तो उसकी मनमोहक सुगंध पूरे इलाके में फैल जाती है, जो बताती है कि गरमागरम नल्ली निहारी तैयार है।

यह 300 साल पुरानी शाही रेसिपी कभी राजा-महाराजाओं के नाश्ते की शान हुआ करती थी, लेकिन आज यह आम लोगों की पसंद बन चुकी है। आइए जानते हैं कैसे यह शाही पकवान जन-जन तक पहुँचा और इसे बनाने का पारंपरिक तरीका क्या है।

नल्ली निहारी: क्या है इसकी खासियत?

निहारी एक ऐसा व्यंजन है जिसे धीमी आँच पर लंबे समय तक पकाया जाता है, लेकिन नल्ली निहारी में मांस को हड्डी सहित (विशेषकर नल्ली या शांक वाले हिस्से) धीमी आँच पर पकाने से उसका स्वाद और भी निखरता है। 'द हिंदू' के फूड कॉलम और प्रसिद्ध फूड हिस्टोरियन के.टी. अचार्या के अनुसार, नरम नल्ली और मसालेदार ग्रेवी वाली नल्ली निहारी की मुख्य विशेषता इसका धीमी गति से पकने का तरीका है, जिसमें कई तरह के सुगंधित मसालों का उपयोग होता है।

इसे बनाने के लिए मटन के हड्डी वाले हिस्से (शंक) का इस्तेमाल होता है जिसे घंटों तक या कभी-कभी तो पूरी रात धीमी आँच पर गलने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस व्यंजन का असली स्वाद 'नल्ली' अर्थात् हड्डी के मज्जे में छिपा है। पकने के दौरान हड्डियों से निकलने वाला प्राकृतिक अर्क (तेल) ही इसकी ग्रेवी को एक अनोखी मखमली बनावट और गाढ़ापन प्रदान करता है, जो इसे बेहद खास बनाता है।

नल्ली निहारी की ऐतिहासिक जड़ें

विशेषज्ञों का मानना है कि 'निहारी' शब्द अरबी के 'नहार' से आया है, जिसका अर्थ 'सुबह' होता है। इतिहासकारों और पाक विशेषज्ञों के अनुसार, निहारी की शुरुआत 18वीं शताब्दी के अंत में मुगल साम्राज्य के दौरान पुरानी दिल्ली (तत्कालीन शाहजहाँनाबाद) में हुई थी। शुरुआत में लोग इसे सुबह की नमाज के बाद खाते थे ताकि पूरे दिन ऊर्जावान महसूस कर सकें। जैसे-जैसे इसकी पौष्टिकता और स्वाद के चर्चे बढ़े, मजदूरों और सिपाहियों ने भी इसे अपने आहार में शामिल करना शुरू कर दिया। यह प्रोटीन से भरपूर थी और शरीर को भरपूर ऊर्जा देती थी, जिससे लंबे समय तक भूख नहीं लगती थी।

दिल्ली बनाम लखनऊ: निहारी की उत्पत्ति पर बहस

निहारी की उत्पत्ति को लेकर दिल्ली और लखनऊ दोनों ही शहरों के बीच एक दिलचस्प बहस है, जहाँ दोनों इसे अपना सर्वश्रेष्ठ व्यंजन मानते हैं। लेखिका अनुथी विशा के अनुसार, काली मिर्च और समृद्ध इतिहास वाला यह व्यंजन सबसे पहले शाहजहाँनाबाद (पुरानी दिल्ली) की गलियों में यमुना के ठंडे पानी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए बनाया गया था।

वहीं, लखनऊ में एक प्रचलित कहानी के अनुसार, निहारी को अवध के नवाब आसफ-उद-दौला ने 1784 में इमामबाड़ा परिसर के निर्माण के दौरान बनवाया था। इन दोनों कहानियों में लगभग 145 साल का अंतर है, जो इसकी उत्पत्ति को और भी रहस्यमय बनाता है।

एनर्जी बूस्टर से विंटर स्पेशल तक

  • सुबह का नाश्ता: शेफ कुणाल कपूर ने बताया है कि निहारी को मूल रूप से सुबह के नाश्ते के लिए 'एनर्जी बूस्टर' के तौर पर तैयार किया गया था, लेकिन धीरे-धीरे लोग इसे दोपहर और रात के खाने में भी खाने लगे।
  • सर्दियों का घरेलू नुस्खा: शेफ रणवीर बरार ने अपने एक वीडियो में बताया है कि सर्दियों में निहारी सर्दी-जुकाम, राइनोरिया और बुखार के लिए एक घरेलू उपचार के रूप में काम करती थी। दिल्ली की सर्दियों में यह न केवल साइनस, सर्दी और बुखार से बचाव करती थी, बल्कि कम तापमान में शरीर को गर्म रखने वाले भोजन के रूप में भी बेहद लोकप्रिय थी।
  • शाही भोजन का प्रभाव: लेखिका सादिया देहलवी ने कहा था कि दिल्ली का खाना सल्तनत काल के व्यंजनों का मिश्रण था जिसे मुगलों ने और भी परिष्कृत किया। फारसी स्पर्श के साथ भारतीय स्वाद का यह मेल जादू कर देता था। नवाब इसे इतना भरपेट खाते थे कि दोपहर तक सो जाते थे। निहारी ऊर्जा से भरपूर थी और सर्दियों में सेना भी इसे खाना पसंद करती थी।

सदियों से निहारी को सर्दियों से जोड़कर देखा जाता रहा है और इसे खाली पेट यानी 'निहार मुँह' खाया जाता था। पहले हर रविवार को घरों में 'निहारी दिवस' मनाया जाता था, जहाँ इसे सुबह के नाश्ते में खाया जाता था। अब लोग इसे साल भर खाते हैं और आमतौर पर दोपहर या रात के खाने में पसंद करते हैं। परंपरागत रूप से इसे गरीब आदमी का खाना माना जाता था और शादियों में कभी नहीं परोसा जाता था, लेकिन अब निहारी त्योहारों और विशेष आयोजनों के पकवानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है, यहाँ तक कि दिल्ली वालों के लिए भी।

दिल्ली की निहारी की अनूठी पहचान

दिल्ली पवेलियन के एग्जीक्यूटिव सॉस शेफ कुशा माथुर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि निहारी मसालों का खेल है। लखनऊ की निहारी हल्की पीली होती है, जबकि पुरानी दिल्ली वाली निहारी लाल-नारंगी रंग के साथ अधिक तीखी होती है। यह सदियों के विकास का परिणाम है। शेफ रणवीर बरार के अनुसार, असली निहारी मटन के सख्त हिस्सों से बनती है, जिसे 6-8 घंटे तक पकाया जाता है। नरम होने पर ही यह अपना बेहतरीन स्वाद देती है।

घर पर बनाएं स्वादिष्ट नल्ली निहारी: आसान रेसिपी

सामग्री:

सामग्री मात्रा
मटन (हड्डी वाला) 1 किलोग्राम
प्याज (पतले कटे हुए) डेढ़ कप
तेल आधा कप
अदरक-लहसुन पेस्ट 3 टेबल स्पून
ताजा टमाटर प्यूरी 2 कप
नमक स्वादानुसार
निहारी मसाला ढाई चम्मच
लाल मिर्च पाउडर 1 टेबल स्पून
सौंठ पाउडर (सूखी अदरक) 2 टेबल स्पून
सौंफ पाउडर 2 टीस्पून
मैदा आधा कप
पानी 1 कप (मैदे के घोल के लिए) + आवश्यकतानुसार पकने के लिए
हरी मिर्च (साबुत, गार्निश के लिए) कुछ
अदरक (पतली कटी हुई, गार्निश के लिए) कुछ
ताजा धनिया (कटा हुआ, गार्निश के लिए) कुछ

बनाने की विधि:

शेफ कुणाल कपूर ने दिल्ली की मशहूर नल्ली निहारी बनाने की एक सरल विधि बताई है:

  1. एक बड़े और भारी तले वाले बर्तन में तेल गरम करें। पतले कटे हुए प्याज को सुनहरा भूरा होने तक भूनें और एक प्लेट में निकालकर अलग रख दें।
  2. उसी बर्तन में मटन के टुकड़े और अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें। कुछ देर तक भूनें जब तक कि मटन का रंग न बदल जाए।
  3. अब इसमें ताजा टमाटर प्यूरी, नमक, निहारी मसाला और लाल मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएँ। इसे तब तक पकाएँ जब तक कि तेल मसाले से अलग होकर ऊपर न आने लगे।
  4. भुने हुए प्याज को हाथ से मसलकर या हल्का पीसकर इस मिश्रण में डालें। फिर इसमें खूब सारा पानी (मटन के गलने के लिए पर्याप्त) और सौंफ पाउडर व सौंठ पाउडर मिलाएँ।
  5. बर्तन को ढक दें और धीमी आँच पर लगभग 3 घंटे तक पकने दें। यदि आपके पास अधिक समय है, तो इसे 6 घंटे तक भी धीमी आँच पर पका सकते हैं, जिससे स्वाद और भी गहरा होगा।
  6. जब निहारी अच्छी तरह पक जाए, तो ढक्कन हटाकर करछी से निहारी के ऊपर तैरते हुए अतिरिक्त तेल को सावधानी से निकाल लें। इसे बाद में गार्निश के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  7. एक अलग कटोरे में मैदे और 1 कप पानी का घोल बना लें (कोई गांठ न रहे)। इस घोल को धीरे-धीरे निहारी में डालते हुए लगातार हिलाते रहें ताकि ग्रेवी गाढ़ी हो जाए।
  8. फिर से ढककर 10 मिनट तक धीमी आँच पर पकाएँ।
  9. गरमागरम नल्ली निहारी को खमीरी रोटी या नान के साथ परोसें। ऊपर से निकाली हुई तरी, बारीक कटी हरी मिर्च, अदरक के लच्छे और ताजे धनिये से गार्निश करें। इसका स्वाद आपको पुरानी दिल्ली की गलियों में खाने का अनुभव कराएगा।