पश्चिम एशिया संघर्ष: इजरायल ने पाकिस्तान की मध्यस्थता के दावों को नकारा, 'जिहादी आतंकवाद' पर गंभीर आरोप
वैश्विक मंच पर इन दिनों अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच गहराता संघर्ष एक चिंता का विषय बना हुआ है। होर्मुज की खाड़ी में अवरोध और तेल की कीमतों में उछाल से दुनिया भर में संकट की स्थिति है। ऐसे नाजुक समय में, पाकिस्तान ने इस तनावपूर्ण माहौल में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का दावा किया है। हालांकि, इजरायल ने पाकिस्तान के इस प्रयास पर कड़ा रुख अपनाया है और उसके दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
इजरायल का पाकिस्तान पर सीधा निशाना: 'जिहादी आतंकवाद' पर बड़ा बयान
इजरायल के विदेश मंत्रालय की विशेष राजदूत, फ्लेउर हसन नाहूम, ने पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, "मुझे यह समझ नहीं आ रहा कि पाकिस्तान क्या हासिल करने की कोशिश कर रहा है। ऐसा लगता है कि वे केवल अपनी प्रासंगिकता साबित करना चाहते हैं।" नाहूम ने पाकिस्तान पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, "मेरे विचार से, वे (पाकिस्तानी) खुद ही जिहादी आतंकवाद की दुनिया में एक बड़ी समस्या हैं।" उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान कोशिश कर सकता है, लेकिन उन्हें इस बात पर संदेह है कि वे सफल होंगे या नहीं। इजरायली राजदूत के अनुसार, पाकिस्तान शायद इस महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दे में अपनी भागीदारी दिखाना चाहता है।
पाकिस्तान के कूटनीतिक प्रयास और क्षेत्रीय बैठकें
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, इस्लामाबाद में हाल ही में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक का आयोजन किया गया था। इस बैठक में मिस्र, तुर्किये और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में तनाव को कम करने के तरीकों पर चर्चा करना था।
- यह बैठक ऐसे समय में हुई जब अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का संघर्ष दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका था।
- बैठक से पहले, चारों देशों के प्रतिनिधियों ने एक साथ समूह फोटो भी खिंचवाई, जो क्षेत्रीय एकजुटता का संकेत था।
इस बैठक में मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलअत्ती, तुर्किये के हाकान फ़िदान और सऊदी अरब के फैसल बिन फरहान शामिल थे। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने इस अवसर पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उनके "प्यारे भाइयों" का इस्लामाबाद में स्वागत करना सम्मान की बात है। उन्होंने साझा किया कि उनकी चर्चाएं क्षेत्रीय परिस्थितियों और शांति व स्थिरता को बढ़ावा देने पर केंद्रित थीं, साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
ईरान ने भी पाकिस्तान की मध्यस्थता को किया खारिज
सिर्फ इजरायल ही नहीं, बल्कि ईरान ने भी पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों से खुद को दूर कर लिया है। भारत में ईरानी वाणिज्य दूतावास द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ उसकी कोई सीधी बातचीत नहीं चल रही है। ईरान ने यह भी कहा कि पाकिस्तान द्वारा बातचीत कराने का प्रयास उसका अपना कदम है और इसमें ईरान की कोई भागीदारी नहीं है। यह घटनाक्रम पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वह इस पूरे संकट में एक संभावित मध्यस्थ के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा था। ईरान के इनकार के बाद, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत कराने की पाकिस्तान की पहल अब कमजोर पड़ती दिख रही है।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, पाकिस्तान की मध्यस्थता के प्रयास दोनों प्रमुख पक्षों, इजरायल और ईरान, द्वारा अस्वीकार कर दिए गए हैं। इजरायल का 'जिहादी आतंकवाद' पर पाकिस्तान को दिया गया बयान और ईरान का मध्यस्थता से इनकार, यह दर्शाता है कि पाकिस्तान के लिए इस जटिल संघर्ष में एक प्रभावी भूमिका निभाना आसान नहीं होगा। वैश्विक शांति के लिए इस क्षेत्र में स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन वर्तमान हालात में किसी भी त्वरित समाधान की संभावना कम दिख रही है।