अमेरिकी धमकियों पर ईरान के सर्वोच्च नेता का कड़ा जवाब: नागरिक ठिकानों पर हमले की निंदा

अमेरिकी धमकियों पर ईरान के सर्वोच्च नेता का कड़ा जवाब: नागरिक ठिकानों पर हमले की निंदा
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी की कड़ी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने ईरान को 'पाषाण युग' में धकेलने की बात कही थी। खामेनेई ने इस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अमेरिका और इजरायल पर ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचों पर लगातार हमले करने का आ...

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी की कड़ी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने ईरान को 'पाषाण युग' में धकेलने की बात कही थी। खामेनेई ने इस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अमेरिका और इजरायल पर ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचों पर लगातार हमले करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इन कथित हमलों को 'मानवता के खिलाफ अपराध' करार दिया और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चुप्पी पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

Key points

  • ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को 'पाषाण युग' में भेजने की धमकी की कड़ी निंदा की है।
  • खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान के पुलों, बिजली संयंत्रों और स्कूलों जैसे नागरिक ठिकानों पर लगातार हमले करने का आरोप लगाया।
  • उन्होंने इन कथित हमलों को 'मानवता के खिलाफ अपराध' बताया, जिसे अमेरिकी सरकार और इजरायली शासन ने अंजाम दिया है।
  • ईरानी नेता ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चुप्पी की आलोचना की, यह सुझाव देते हुए कि वे इस आक्रामकता में भागीदार बन रही हैं।
  • खामेनेई ने कहा कि अमेरिका आए दिन युद्ध और विनाश की धमकियां दे रहा है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

What we know so far

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने एक बयान जारी कर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी का पुरजोर खंडन किया है, जिसमें ट्रंप ने ईरान को 'पाषाण युग' में वापस भेजने की बात कही थी। इस बयान में खामेनेई ने स्पष्ट रूप से कहा है कि दुश्मन खुले तौर पर यह दावा कर रहा है कि वह अपने हमलों के माध्यम से ईरान को ऐतिहासिक रूप से पीछे धकेलना चाहता है। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया कि वे ईरान में नागरिक बुनियादी ढांचे को लगातार निशाना बना रहे हैं। उनके अनुसार, ईरान के पुलों, बिजली संयंत्रों, स्कूलों और अन्य महत्त्वपूर्ण ठिकानों पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे हमले 'मानवता के खिलाफ अपराध' के स्पष्ट उदाहरण हैं। खामेनेई ने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा कि ये कृत्य अमेरिकी सरकार और 'हत्यारी इजरायली शासन' द्वारा किए जा रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संस्थाओं की चुप्पी पर भी गहरी निराशा व्यक्त की है, यह कहते हुए कि उनकी निष्क्रियता शायद इस आक्रामकता को और बढ़ावा देने में मदद कर रही है। खामेनेई ने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिका हर दिन युद्ध, धमकियों और विनाश का ढोल जोर-शोर से पीट रहा है, जिसे उन्होंने एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताया।

Context and background

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह दशकों पुरानी भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का एक हिस्सा है, जिसकी जड़ें 1979 की ईरानी क्रांति में गहरी हैं। इस क्रांति ने पश्चिमी समर्थित शाह को हटाकर एक इस्लामी गणराज्य की स्थापना की थी, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका ने ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश करने, आतंकवाद का समर्थन करने और मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया है, जबकि ईरान अमेरिका पर अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करने और क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाता रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान यह तनाव विशेष रूप से बढ़ गया था। ट्रंप प्रशासन ने 2015 के ईरान परमाणु समझौते (जिसे औपचारिक रूप से संयुक्त व्यापक कार्य योजना या JCPOA कहा जाता है) से एकतरफा रूप से हटने का फैसला किया था। इस समझौते का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना था, जिसके बदले में उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाया जाना था। समझौते से हटने के बाद, अमेरिका ने ईरान पर 'अधिकतम दबाव' अभियान के तहत कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा। ट्रंप की "पाषाण युग" वाली धमकी इसी आक्रामक बयानबाजी का एक हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य ईरान पर दबाव बनाना और उसकी नीतियों को बदलना था। ऐसी धमकियां अक्सर केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर निहितार्थ रखती हैं, क्योंकि वे गलत अनुमानों और अनपेक्षित सैन्य टकरावों का जोखिम बढ़ा सकती हैं।

ईरान द्वारा अमेरिका और इजरायल पर नागरिक ठिकानों पर हमला करने के आरोप अत्यंत गंभीर हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून, विशेष रूप से जेनेवा कन्वेंशन, युद्ध के दौरान नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने पर रोक लगाता है। पुल, बिजली संयंत्र और स्कूल जैसे नागरिक प्रतिष्ठान युद्ध के नियमों के तहत संरक्षित होते हैं। यदि ये आरोप सत्य हैं, तो ये मानवता के खिलाफ युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है, और ईरान अक्सर पश्चिमी देशों पर अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करने और अपने राष्ट्रीय हितों को कमजोर करने का आरोप लगाता रहा है।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, जैसे संयुक्त राष्ट्र और उसकी मानवाधिकार परिषद, की भूमिका संघर्षों की निगरानी करने, अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की जांच करने और शांति व सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण होती है। खामेनेई द्वारा उनकी 'चुप्पी' की आलोचना इस बात पर प्रकाश डालती है कि ईरान को लगता है कि इन संस्थाओं ने इस मामले में अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की है। ऐसी चुप्पी, यदि वास्तविक है, तो संघर्ष के पीड़ित पक्षों में विश्वास की कमी पैदा कर सकती है और यह धारणा बना सकती है कि अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वाले जवाबदेह नहीं ठहराए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों को बढ़ावा मिल सकता है। यह मुद्दा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ईरान और इजरायल के बीच पहले से ही गंभीर तनाव और परोक्ष संघर्ष चल रहे हैं, और अमेरिका इन दोनों के बीच एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

What happens next

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का यह नवीनतम दौर संभवतः जारी रहेगा, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहेंगे। ऐसी धमकियों और आरोपों के बाद तत्काल कोई बड़ा सैन्य टकराव होने की पुष्टि नहीं है, लेकिन यह निश्चित रूप से कूटनीतिक माहौल को और खराब करेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस बात पर टिकी रहेंगी कि क्या कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था ईरान के आरोपों की जांच के लिए कदम उठाती है या नहीं। इसके अलावा, मध्य पूर्व में क्षेत्रीय गतिशीलता पर भी इसका असर पड़ सकता है, जहां ईरान और उसके सहयोगी विभिन्न संघर्षों में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयानों से गलतफहमी या अनपेक्षित वृद्धि का जोखिम बढ़ जाता है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है। दोनों देशों के बीच भविष्य के संबंध अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के परिणामों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत पर भी निर्भर करेंगे।

FAQ

  • प्रश्न: ईरान के सर्वोच्च नेता ने किसकी आलोचना की है?
    उत्तर: ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी की कड़ी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने ईरान को 'पाषाण युग' में भेजने की बात कही थी।
  • प्रश्न: ईरान ने किन देशों पर नागरिक ठिकानों पर हमला करने का आरोप लगाया है?
    उत्तर: खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान के पुलों, बिजली संयंत्रों, स्कूलों और अन्य नागरिक बुनियादी ढांचों पर लगातार हमला करने का आरोप लगाया है।
  • प्रश्न: इन कथित हमलों को क्या कहा गया है?
    उत्तर: खामेनेई ने इन कथित हमलों को 'मानवता के खिलाफ अपराध' करार दिया है।
  • प्रश्न: अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर क्या आरोप लगाया गया है?
    उत्तर: खामेनेई ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चुप्पी की आलोचना की है, यह सुझाव देते हुए कि वे इस आक्रामकता में भागीदार बन रही हैं।
  • प्रश्न: 'पाषाण युग' में भेजने की धमकी का क्या अर्थ है?
    उत्तर: इस धमकी का अर्थ ईरान को तकनीकी, सामाजिक और आर्थिक रूप से इतना पीछे धकेलना है कि वह आधुनिक युग से कट जाए, जैसा कि प्राचीन पाषाण युग में होता था।