ईरान की 'MIT' शरीफ यूनिवर्सिटी पर मंडराया संकट: तकनीकी भविष्य पर ताजा विश्लेषण

ईरान की 'MIT' शरीफ यूनिवर्सिटी पर मंडराया संकट: तकनीकी भविष्य पर ताजा विश्लेषण
दुनिया इसे 'मध्य पूर्व का एमआईटी' कहती है। ईरान के दिल में बसी शरीफ यूनिवर्सिटी (Sharif University) ने ऐसे इंजीनियरों को जन्म दि...

ईरान की 'MIT' शरीफ यूनिवर्सिटी पर मंडराया संकट: तकनीकी भविष्य पर ताजा विश्लेषण

दुनिया इसे 'मध्य पूर्व का एमआईटी' कहती है। ईरान के दिल में बसी शरीफ यूनिवर्सिटी (Sharif University) ने ऐसे इंजीनियरों को जन्म दिया है, जो आज वैश्विक उद्योगों को नई दिशा दे रहे हैं। इस विश्वविद्यालय की पहचान सिर्फ इसकी अकादमिक उत्कृष्टता या शोध से नहीं, बल्कि समस्याओं को हल करने और नवाचार की उस भावना से है, जो इसकी रग-रग में समाई है।

लेकिन आज हालात कुछ और हैं। हाल ही में, जब मध्य पूर्व के आसमान में अमेरिकी और इजरायली लड़ाकू विमानों की गर्जना गूंज रही थी और तेहरान मिसाइल हमलों से हिल रहा था, तब ईरान का यह महत्वपूर्ण शिक्षा संस्थान भी विनाश के डर से सहमा हुआ था। लोगों को केवल इमारतों के ढहने का डर नहीं है, बल्कि यह चिंता है कि यदि यह संस्थान नष्ट हो गया, तो ईरान में इंजीनियरिंग का भविष्य क्या होगा?

आईआईटी से भी कड़ा है मुकाबला!

शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी का नाम विश्व भर में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। भले ही क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग जैसे मानदंडों पर इसे हमेशा शीर्ष स्थान न मिले, लेकिन इसकी प्रतिष्ठा ऐसी है कि भारत के प्रतिष्ठित आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) भी इससे प्रतिस्पर्धा करने में मुश्किल महसूस करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संस्थान विशेष रूप से वैश्विक स्तर के इंजीनियर तैयार करने के लिए ही बनाया गया है।

यह एक सच्चाई है कि आज ईरान के पास जो उन्नत मिसाइल तकनीक और ड्रोन क्षमता है, उसका बहुत बड़ा श्रेय शरीफ यूनिवर्सिटी को ही जाता है। 1960 के दशक से ही इस विश्वविद्यालय ने ईरान को तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने की नींव रखी थी।

इंजीनियरिंग का वो गढ़, जिसका लोहा मानता है सिलिकॉन वैली

ईरान में इंजीनियरिंग की यह चमक रातों-रात नहीं आई है। यहां की राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा इतनी कठिन होती है कि इसे पास करना दुनिया के सबसे मुश्किल इम्तिहानों में से एक माना जाता है।

  • कठोर चयन: लाखों उम्मीदवारों में से केवल शीर्ष 1% छात्रों को ही यहां प्रवेश मिल पाता है।
  • वैश्विक प्रभाव: आज गूगल, फेसबुक और एप्पल जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियों में उच्च पदों पर कार्यरत कई ईरानी इंजीनियर इसी शरीफ यूनिवर्सिटी की देन हैं।
  • पुरानी विरासत: ईरान ने इंजीनियरिंग का इतना मजबूत ढांचा उस समय खड़ा कर लिया था, जब दुनिया में 'टेक बूम' की शुरुआत भी नहीं हुई थी।

प्रतिबंधों के बीच 'जुगाड़' नहीं, 'नवाचार' से जीती बाजी

ईरान की इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा तब हुई जब उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए गए। जब विदेशी तकनीक और मशीनों के रास्ते बंद हो गए, तो यहां के इंजीनियरों ने हार मानने के बजाय अपने स्वयं के रास्ते बनाए। उन्होंने अपने खुद के सॉफ्टवेयर, चिकित्सा उपकरण और उपग्रह विकसित किए। 1979 के बाद से ईरान ने लगभग 130 बांधों का निर्माण किया और एक विशाल जल नेटवर्क स्थापित किया।

कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाली उन्नत दवाओं से लेकर रक्षा प्रौद्योगिकी तक, ईरान आज आत्मनिर्भरता का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

प्रयोगशालाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

ईरान की वैज्ञानिक प्रगति की एक और महत्वपूर्ण तस्वीर यहां की प्रयोगशालाओं में दिखाई देती है। हाल के दशकों में रोबोटिक्स, नैनोटेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस जैसे जटिल क्षेत्रों में महिला शोधकर्ताओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। शरीफ यूनिवर्सिटी की प्रयोगशालाओं में आज महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर सबसे चुनौतीपूर्ण तकनीकों पर काम कर रही हैं, जो देश के तकनीकी भविष्य को आकार दे रही हैं।