लेटेस्ट न्यूज़: ईरान का कोंकूर एग्जाम - युद्ध के बीच छात्रों का खौफ और सेना भर्ती का बड़ा खतरा

लेटेस्ट न्यूज़: ईरान का कोंकूर एग्जाम - युद्ध के बीच छात्रों का खौफ और सेना भर्ती का बड़ा खतरा
ईरान इन दिनों आसमान से बरसती मिसाइलों के कारण सुर्खियों में है, लेकिन देश के लाखों युवाओं के दिलों में एक और गहरा डर...

मिसाइलों के साये में ईरान का सबसे कठिन इम्तिहान

ईरान इन दिनों आसमान से बरसती मिसाइलों के कारण सुर्खियों में है, लेकिन देश के लाखों युवाओं के दिलों में एक और गहरा डर घर कर गया है। यह डर है 'कोंकूर' (Konkur) का, जिसे दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इस साल यह सिर्फ डॉक्टर या इंजीनियर बनने की चुनौती नहीं है, बल्कि इससे फेल होने पर 'बंदूक उठाने' का सीधा खतरा जुड़ा है। यह ताज़ा अपडेट ईरान के छात्रों के भविष्य पर युद्ध के गंभीर असर को दर्शाता है।

कोंकूर: सिर्फ परीक्षा नहीं, सेना से बचने का कवच

ईरानी कानून के अनुसार, 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके प्रत्येक पुरुष के लिए डेढ़ से दो साल की अनिवार्य सैन्य सेवा आवश्यक है। इस सेवा से बचने का एकमात्र तरीका यह है कि वे किसी विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हों। इसी वजह से 'कोंकूर' परीक्षा वहां के लड़कों के लिए एक 'सुरक्षा कवच' का काम करती है। यदि छात्र यह परीक्षा उत्तीर्ण कर लेते हैं, तो वे कॉलेज में अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं। लेकिन अगर वे इसमें असफल होते हैं, तो उन्हें सीधे सेना की वर्दी पहनकर युद्ध के मोर्चे पर भेजा जा सकता है। मौजूदा युद्ध जैसी स्थिति ने इस डर को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे छात्रों में भारी चिंता है।

बंकरों में पढ़ाई, इंटरनेट ठप: युद्ध का पढ़ाई पर गहरा असर

मार्च 2026 की नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान और इस्फहान जैसे प्रमुख शहरों में हुई बमबारी के कारण स्कूल और कॉलेज बंद हैं। छात्र अब पुस्तकालयों के बजाय बंकरों और बेसमेंट में बैठकर 'कोंकूर' की तैयारी करने को मजबूर हैं। इंटरनेट ब्लैकआउट के चलते ऑनलाइन कोचिंग सेवाएं भी ठप पड़ गई हैं, जिससे उनकी तैयारी और भी मुश्किल हो गई है। युद्ध के बढ़ते खतरे को देखते हुए, CBSE ने भी ईरान सहित कई खाड़ी देशों में अपनी बोर्ड परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है, जो इस क्षेत्र में शिक्षा पर पड़े व्यापक असर को दर्शाता है।

क्यों भारत के JEE और NEET से भी मुश्किल है यह टेस्ट?

भारत में इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं (जैसे JEE और NEET) आमतौर पर 3 घंटे की होती हैं, जबकि 'कोंकूर' में छात्रों को बिना किसी ब्रेक के लगातार साढ़े चार घंटे तक पेपर देना होता है। इसकी पाठ्यक्रम सूची भी काफी विस्तृत और मजबूत है, जिसमें विज्ञान विषयों के साथ-साथ फारसी साहित्य, अरबी और धार्मिक शिक्षाओं का भी गहन परीक्षण किया जाता है।

मुख्य अंतरों पर एक नज़र:

  • परीक्षा अवधि: कोंकूर में 4.5 घंटे बनाम भारत में 3 घंटे।
  • पाठ्यक्रम की व्यापकता: विज्ञान के साथ फारसी साहित्य, अरबी और धार्मिक अध्ययन।
  • विकल्पों की कमी: भारत में खराब रैंक आने पर भी निजी कॉलेजों का विकल्प होता है। ईरान में अच्छी रैंक न मिलने का मतलब है अपनी पसंद का करियर हमेशा के लिए खो देना और सीधा सेना में भर्ती होना

कोंकूर 2026: परीक्षा की तारीखें और मौजूदा अनिश्चितता

आमतौर पर, ईरान में 'कोंकूर' का आयोजन साल में दो बार किया जाता है, जिससे छात्रों को दो अवसर मिलते हैं। लेकिन इस साल चल रहे युद्ध ने पूरे कार्यक्रम को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

सामान्य परीक्षा कार्यक्रम:

  1. पहला चरण: यह परीक्षा सामान्यतः मई/जून (ईरानी कैलेंडर के अनुसार 'ओर्दीबेहेश्ट') में आयोजित की जाती है।
  2. दूसरा चरण: मुख्य परीक्षा जुलाई के महीने में होती है।

मौजूदा स्थिति (मार्च 2026): ईरान-इजरायल संघर्ष और हवाई क्षेत्र बंद होने की वजह से ईरान की राष्ट्रीय शैक्षिक परीक्षण संस्था (संजेश) ने संकेत दिए हैं कि परीक्षाओं में देरी हो सकती है। कई शहरों में परीक्षा केंद्रों को बंकरों के पास स्थानांतरित करने पर भी विचार चल रहा है, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह स्थिति ईरान के लाखों छात्रों के लिए एक बड़ी चुनौती और अनिश्चितता का विषय बनी हुई है।