हालिया घटनाक्रम में, ईरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं का एक और प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच, ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें एक विशाल भूमिगत सुरंग के भीतर हमलावर ड्रोनों और मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) का एक बड़ा भंडार दिखाई दे रहा है। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच टकराव को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
ईरान की भूमिगत ड्रोन फैक्ट्री का खुलासा
IRGC द्वारा जारी किए गए इस ताजा वीडियो में, सैकड़ों की संख्या में ड्रोन एक लंबी सुरंग के अंदर व्यवस्थित ढंग से खड़े दिखाई देते हैं। इनमें से कुछ ड्रोन लॉन्च पैड पर लगे हुए हैं, जबकि अन्य को विशेष स्टैंड पर रखा गया है। नारंगी-लाल रोशनी से जगमगाती इस सुरंग में ये शक्तिशाली ड्रोन साफ तौर पर देखे जा सकते हैं। दीवारों पर ईरानी झंडे और विभिन्न सैन्य उपकरण भी नजर आते हैं, जो ईरान की मजबूत सैन्य उपस्थिति का संकेत देते हैं।
वैश्विक तनाव के बीच ईरान की रणनीति
यह वीडियो रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया भर में ईरान और पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव अपने चरम पर है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि ईरान किसी भी दबाव में झुकने को तैयार नहीं है और यह संघर्ष अभी और लंबा खिंच सकता है। ईरान ने पहले भी इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में कम लागत वाले 'शाहेद' ड्रोनों का इस्तेमाल किया है। इन ड्रोनों का मुख्य लक्ष्य सैन्य ठिकाने और ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे रहे हैं।
- शाहेद ड्रोन की खासियतें:
- इन्हें इस्तेमाल करना अपेक्षाकृत आसान होता है।
- जमीन पर इन्हें पूरी तरह से नष्ट करना बेहद मुश्किल माना जाता है।
- ईरान अपनी सैन्य रणनीति में इनका बार-बार उपयोग कर रहा है।
भूमिगत ठिकाने: ईरान की रक्षा का महत्वपूर्ण स्तंभ
ईरान के सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' ने इस फुटेज को साझा करते हुए दावा किया है कि यह IRGC के ड्रोन हथियारों के विशाल भंडार का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सुरंग ईरान के तथाकथित "मिसाइल सिटी" या किसी अन्य गुप्त भूमिगत सैन्य अड्डे का हिस्सा हो सकती है। ईरान ने पहले भी ऐसे कई गुप्त ठिकानों का खुलासा किया है। उदाहरण के लिए, "ओकाब-44 (Eagle 44)" नामक एक भूमिगत एयरबेस की जानकारी सामने आई थी, जहाँ लड़ाकू जेट और ड्रोनों को दुश्मन के संभावित हमलों से बचाने के लिए सुरक्षित रखा जाता है।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के भूमिगत ठिकाने ईरान की सैन्य रणनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये ठिकाने ड्रोनों और मिसाइलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तेजी से तैनात करने में मदद करते हैं।
अमेरिका की प्रतिक्रिया और वैश्विक ऊर्जा पर प्रभाव
एक ओर, अमेरिका लगातार यह दावा करता रहा है कि वह ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर कर रहा है। इसके बावजूद, ईरान द्वारा किए जा रहे ड्रोन हमलों की घटनाओं ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को अपने रक्षा प्रणालियों को लगातार सक्रिय रखने पर मजबूर कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से "बिना शर्त आत्मसमर्पण" की मांग की थी, जिसे तेहरान ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके बजाय, ईरान ने संघर्ष को खाड़ी क्षेत्र तक फैला दिया है।
इस विस्तार के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल और गैस की आवाजाही पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा कीमतों पर काफी दबाव बढ़ गया है। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।