ईरान का बड़ा हमला: अमेरिकी THAAD एयर डिफेंस सिस्टम जॉर्डन में ध्वस्त, नवीनतम रिपोर्ट

ईरान का बड़ा हमला: अमेरिकी THAAD एयर डिफेंस सिस्टम जॉर्डन में ध्वस्त, नवीनतम रिपोर्ट
ताजा खबर: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच, ईरान ने अमेरिकी वायु रक्षा प्रणालियों पर बड़े हमले किए हैं। एक नई रिपोर्ट...

ताजा खबर: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच, ईरान ने अमेरिकी वायु रक्षा प्रणालियों पर बड़े हमले किए हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अरब प्रायद्वीप में स्थित कई महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए इन हमलों से अमेरिकी निर्मित रडार सिस्टम को भारी क्षति पहुँची है। जॉर्डन में तैनात अमेरिकी 'थाड' (THAAD) मिसाइल बैटरी का रडार पूरी तरह से नष्ट हो गया है, जिसे एक बड़ी सामरिक सफलता माना जा रहा है।

जॉर्डन में अमेरिकी थाड रडार पर विनाशकारी हमला

उपग्रह से मिली तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर स्थित अमेरिकी 'थाड' मिसाइल डिफेंस सिस्टम का AN/TPY-2 रडार पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। यह रडार प्रणाली, जिसका निर्माण रेथियॉन कंपनी करती है, लगभग आधा अरब डॉलर (50 करोड़ डॉलर) की लागत वाली है। तस्वीरों में रडार के पास 13 फीट गहरे दो बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं, जो सीधे हमले का संकेत देते हैं।

  • यह एयर बेस ईरान से लगभग 500 मील दूर है और अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
  • युद्ध शुरू होने से पहले, इस रनवे पर 50 से अधिक जेट, ड्रोन और परिवहन विमान देखे गए थे।
  • यह AN/TPY-2 पोर्टेबल रडार पांच 40 फुट लंबे ट्रेलरों में फैला हुआ था, जो अब पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है।

अन्य ठिकानों पर भी निशाना: यूएई और सऊदी अरब

हमलों का यह सिलसिला केवल जॉर्डन तक ही सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है।

  • सऊदी अरब: 1 मार्च की उपग्रह तस्वीरों में प्रिंस सुल्तान एयर बेस के पास एक रडार साइट से धुआँ उठता देखा गया।
  • संयुक्त अरब अमीरात: 28 फरवरी से 1 मार्च के बीच रुवैस और सादेर के पास स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों पर भी हमले हुए। रुवैस में कम से कम तीन और सादेर में चार इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जहाँ थाड बैटरी और रडार सिस्टम रखे जाते थे।

अमेरिकी अधिकारियों ने इन हमलों से हुए नुकसान पर सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। यूएई के पास अपनी दो थाड बैटरियां हैं, जबकि अमेरिका भी वहाँ अपनी इकाइयाँ संचालित करता है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नुकसान किसका अधिक हुआ है।

थाड रडार का महत्व और प्रभाव

हथियार विशेषज्ञ एन.आर. जेनजेन-जोन्स के अनुसार, AN-TPY/2 रडार वास्तव में थाड बैटरी का 'हृदय' है। यह रडार ही आने वाली मिसाइलों और हवाई खतरों की सटीक तस्वीर प्रदान करता है और इंटरसेप्टर मिसाइलों को लॉन्च करने में मदद करता है।

उन्होंने बताया कि:

  1. एक भी रडार का नुकसान एक महत्वपूर्ण परिचालन घटना है क्योंकि इसे आसानी से बदला नहीं जा सकता।
  2. प्रतिस्थापन इकाई को कहीं और से मंगाने में काफी समय और प्रयास लगता है।
  3. रडार के बिना सिस्टम पूरी तरह बेकार नहीं होता, लेकिन इसकी सुरक्षा करने और बड़े क्षेत्र की रक्षा करने की क्षमता गंभीर रूप से घट जाती है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कतर के उम्म दहल में स्थित अमेरिकी निर्मित 'अर्ली वार्निंग' रडार सिस्टम को भी क्षति पहुँची है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने जानबूझकर संचार, रडार और खुफिया उपकरणों को निशाना बनाया है, ताकि अमेरिकी ठिकानों का बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाए।

बढ़ती सैन्य गतिविधि और भविष्य की चुनौतियाँ

इन हवाई हमलों के बीच, यूएई के आसमान में लड़ाकू विमानों की सक्रियता बढ़ गई है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने पुष्टि की है कि फ्रांस ने यूएई में अपने सैन्य अड्डों की रक्षा के लिए राफेल लड़ाकू विमान तैनात किए हैं।

यूएई ने जानकारी दी है कि युद्ध के पहले दिन 137 मिसाइलें दागी गई थीं, जो गुरुवार तक घटकर केवल सात रह गई हैं। हालांकि, बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या घटी है, लेकिन ड्रोन हमलों अभी भी जारी हैं। ईरान की ओर से अब तक यूएई पर कुल 1,072 ड्रोन और 196 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जा चुकी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि थाड जैसे सिस्टम को पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली के साथ जोड़कर सुरक्षा की कई परतें बनाई जाती हैं। ईरान की वर्तमान रणनीति इन परतों को भेदने की है। यदि रडार नेटवर्क ध्वस्त हो जाता है, तो मिसाइल डिफेंस सिस्टम बिना किसी सटीक जानकारी के काम करने लगता है, जिससे उसकी प्रभावशीलता कम हो जाती है। ईरान के इस कदम ने अमेरिका को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है। अब चुनौती यह है कि इन महंगे और दुर्लभ रडार सिस्टम को कितनी जल्दी बदला जा सकता है, क्योंकि युद्ध लंबा खींचने के आसार हैं और हवाई हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।