होर्मुज जलडमरूमध्य तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा: थार रेगिस्तान से बढ़ा तेल उत्पादन

होर्मुज जलडमरूमध्य तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा: थार रेगिस्तान से बढ़ा तेल उत्पादन
दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति पर मंडरा रहे संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका असर पाकिस्तान, बांग्लादेश, वियतनाम और ब्रिटेन जैसे देश...

दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति पर मंडरा रहे संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका असर पाकिस्तान, बांग्लादेश, वियतनाम और ब्रिटेन जैसे देशों पर पड़ा है। हालांकि, भारत सरकार ने इस चुनौती का सामना करने के लिए सक्रिय रूप से 'थार प्लान' को लागू किया है। इस योजना के तहत, राजस्थान के थार रेगिस्तान में स्थित तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जिससे देश में तेल की आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने में मदद मिली है।

मुख्य बिंदु

  • होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में व्यवधान आया है, जिससे कई देशों में संकट गहरा गया है।
  • भारत सरकार ने इस वैश्विक तनाव के बीच घरेलू तेल आपूर्ति को बनाए रखने के लिए 'थार प्लान' सक्रिय किया है।
  • ऑयल इंडिया लिमिटेड (Oil India) ने राजस्थान के थार रेगिस्तान में अपने तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल के उत्पादन में भारी वृद्धि की है।
  • जोधपुर बलुआ पत्थर संरचना से अब प्रतिदिन रिकॉर्ड 1,202 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 70% अधिक है।
  • पेट्रोलियम मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है, रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं, और पेट्रोल पंपों पर ईंधन की आपूर्ति सामान्य है।
  • थार रेगिस्तान जैसे चुनौतीपूर्ण भूवैज्ञानिक क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाना भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में गैर-पारंपरिक संसाधनों की क्षमता को दर्शाता है।

अब तक क्या जानकारी है

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने के बाद से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हुआ है। इस स्थिति ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, वियतनाम और यहां तक कि ब्रिटेन जैसे देशों में भी तेल संकट को गहरा दिया है। भारत भी इस वैश्विक अनिश्चितता से प्रभावित हुआ, लेकिन सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाया है। सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने राजस्थान के थार रेगिस्तान में स्थित अपने तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल के उत्पादन में महत्वपूर्ण वृद्धि की है।

पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, जोधपुर बलुआ पत्थर संरचना से वर्तमान में प्रतिदिन 1,202 बैरल कच्चे तेल का रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है। यह पिछले वर्ष के 705 बैरल प्रति दिन के उत्पादन की तुलना में लगभग 70% की प्रभावशाली वृद्धि को दर्शाता है। ऑयल इंडिया जैसलमेर के बाघेवाला तेल क्षेत्र से उत्पादित कच्चे तेल को टैंकरों के माध्यम से गुजरात के मेहसाणा स्थित ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) के संयंत्रों तक पहुंचाती है। वहां से इस कच्चे तेल को पाइपलाइन के जरिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) द्वारा संचालित कोयली रिफाइनरी तक भेजा जाता है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में, ऑयल इंडिया ने अपने राजस्थान क्षेत्र से कुल 43,773 मीट्रिक टन कच्चे तेल का उत्पादन किया, जो पिछले वर्ष के 32,787 मीट्रिक टन की तुलना में काफी अधिक है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सरकार आपूर्ति बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। मंत्रालय के अनुसार, देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं, कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, और देशभर के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल की आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य है। एक अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि थार रेगिस्तान क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण भूवैज्ञानिक परिस्थितियों को देखते हुए तेल उत्पादन में यह वृद्धि भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में गैर-पारंपरिक संसाधनों की क्षमता का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।

बीकानेर-नागौर उप-बेसिन में स्थित बाघेवाला तेल क्षेत्र, भारत के कुछ गिने-चुने तटवर्ती भारी तेल क्षेत्रों में से एक है, जिसे 1991 में खोजा गया था। यह क्षेत्र 200.26 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और इसमें कुल 52 कुएं हैं, जिनमें से 33 वर्तमान में सक्रिय हैं। ऑयल इंडिया ने पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 72% अधिक, 19 कुओं में सीएसएस (Cyclic Steam Stimulation) संचालन पूरा किया है। इसके अतिरिक्त, कंपनी ने 13 नए कुएं खोदे हैं, जो पहले के 9 कुओं से अधिक हैं। कंपनी ने पहली बार 2018 में सीएसएस तकनीक का प्रायोगिक परीक्षण किया था, जिससे इस क्षेत्र से बड़े पैमाने पर तेल निकालना संभव हो सका। हालांकि, यहां कच्चे तेल की उच्च चिपचिपाहट को देखते हुए, कंपनी ने उत्पादन बनाए रखने के लिए डाइल्यूएंट इंजेक्शन और आर्टिफिशियल लिफ्ट सिस्टम जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाया है, और बाघेवाला क्षेत्र से कच्चे तेल का उत्पादन 2017 से लगातार जारी है।

संदर्भ और पृष्ठभूमि

होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जिससे होकर खाड़ी देशों से तेल का एक बड़ा हिस्सा दुनिया के अन्य हिस्सों में निर्यात होता है। जब भी इस जलडमरूमध्य में तनाव या व्यवधान उत्पन्न होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ता है। ईरान द्वारा इसे बंद करने की धमकी या कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, जिससे आयात पर निर्भर देशों जैसे भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ जाता है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85% आयात पर निर्भर करता है। ऐसे में, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी तरह का व्यवधान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। यही कारण है कि घरेलू तेल उत्पादन को बढ़ाना, विशेष रूप से थार जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों से, भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह न केवल आयात पर निर्भरता कम करता है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौरान देश को ऊर्जा संकट से बचाने में भी मदद करता है।

थार रेगिस्तान में पाए जाने वाले भारी तेल को निकालना एक जटिल प्रक्रिया है। भारी तेल, जैसा कि नाम से पता चलता है, अधिक चिपचिपा होता है और इसे पारंपरिक तरीकों से निकालना मुश्किल होता है। इसके लिए विशेष तकनीकों जैसे सीएसएस (Cyclic Steam Stimulation) और डाइल्यूएंट इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। सीएसएस में, कुएं में भाप डाली जाती है ताकि तेल गर्म होकर पतला हो जाए और उसे आसानी से बाहर निकाला जा सके। डाइल्यूएंट इंजेक्शन में, तेल को पतला करने के लिए उसमें अन्य तरल पदार्थ मिलाए जाते हैं। इन तकनीकों का सफलतापूर्वक उपयोग करके उत्पादन बढ़ाना ऑयल इंडिया लिमिटेड और भारत के लिए एक तकनीकी उपलब्धि है, जो देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आगे क्या होगा

वैश्विक तेल बाजार पर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति का प्रभाव निकट भविष्य में जारी रहने की संभावना है। भारत सरकार और ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम घरेलू तेल उत्पादन को बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयासों को जारी रखेंगे। उम्मीद है कि थार जैसे क्षेत्रों में और अधिक अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियों में निवेश किया जाएगा ताकि देश की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा किया जा सके। सरकार अपनी ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और आयात पर निर्भरता को कम करने पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा और अन्य गैर-पारंपरिक स्रोतों का विकास भी शामिल है। वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य और अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों पर लगातार नजर रखी जाएगी ताकि किसी भी संभावित संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • प्रश्न: होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?

    उत्तर: यह खाड़ी देशों से तेल निर्यात का एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होती है और कीमतें बढ़ती हैं, जिससे दुनिया भर के देशों पर असर पड़ता है।

  • प्रश्न: 'थार प्लान' क्या है?

    उत्तर: यह भारत सरकार की एक पहल है जिसके तहत वैश्विक तेल संकट के बीच राजस्थान के थार रेगिस्तान से कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है ताकि घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

  • प्रश्न: थार में तेल उत्पादन में कितनी वृद्धि हुई है?

    उत्तर: जोधपुर बलुआ पत्थर संरचना से दैनिक उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 70% की वृद्धि हुई है, जो अब प्रति दिन 1,202 बैरल है।

  • प्रश्न: भारत में तेल की आपूर्ति की वर्तमान स्थिति क्या है?

    उत्तर: पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है, रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं, और पेट्रोल पंपों पर ईंधन की आपूर्ति सामान्य है।

  • प्रश्न: बाघेवाला तेल क्षेत्र कब खोजा गया था और इसकी क्या विशेषता है?

    उत्तर: इसे साल 1991 में खोजा गया था। यह भारत के कुछ गिने-चुने तटवर्ती भारी तेल क्षेत्रों में से एक है, जहां उच्च चिपचिपाहट वाले तेल को निकालने के लिए विशेष तकनीकों का उपयोग किया जाता है।