प्रयागराज: बटुक यौन शोषण मामले से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने इस पूरे विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी ने अब अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। उन्होंने घोषणा की है कि वे इस कानूनी लड़ाई से स्वयं को अलग कर रहे हैं। ब्रह्मचारी ने पुलिस और सरकार पर गंभीर निष्क्रियता और असहयोग का आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें अब न्याय मिलने की उम्मीद लगभग समाप्त हो गई है।
आशुतोष ब्रह्मचारी ने क्यों छोड़ी कानूनी लड़ाई?
आशुतोष ब्रह्मचारी ने इस संवेदनशील मामले से पीछे हटने के कई महत्वपूर्ण कारण बताए हैं, जो न्याय प्रणाली और पीड़ित पक्ष की चुनौतियों को उजागर करते हैं:
- शुरुआती असहयोग: उनका आरोप है कि इस प्रकरण की शुरुआत से ही उन्हें किसी भी प्रकार का अपेक्षित सहयोग प्राप्त नहीं हुआ।
- एफआईआर में देरी और निष्क्रियता: ब्रह्मचारी के अनुसार, पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में अनावश्यक विलंब किया। यहां तक कि जब न्यायालय के निर्देश पर मामला दर्ज हुआ, तब भी कथित आरोपी के खिलाफ कोई ठोस या त्वरित कार्रवाई नहीं की गई।
- आरोपी को बचाव का अवसर: उन्होंने दावा किया कि आरोपी अविमुक्तेश्वरानंद को बचाने का प्रयास किया गया, जिससे उन्हें अदालतों से राहत पाने के लिए पर्याप्त समय मिल गया।
- संसाधनों का अभाव: आशुतोष ब्रह्मचारी ने बताया कि उनके पास न तो बड़े वकीलों की फीस चुकाने के लिए पर्याप्त धन है और न ही वे इतनी लंबी और खर्चीली कानूनी लड़ाई लड़ने में सक्षम हैं। इसके विपरीत, आरोपी पक्ष के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है।
- पीड़ितों की सुरक्षा पर चिंता: उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनके बटुकों (पीड़ित शिष्यों) की सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं है, तो वे कैसे अदालती प्रक्रियाओं में शामिल हो सकते हैं।
- पॉक्सो कानून के बावजूद धीमी कार्रवाई: ब्रह्मचारी ने कहा कि उन्होंने सभी आवश्यक सबूत संबंधित एजेंसियों को सौंप दिए हैं और यह मामला पॉक्सो कानून के तहत आता है, फिर भी कार्रवाई में यह असाधारण सुस्ती समझ से परे है।
पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
आशुतोष ब्रह्मचारी ने यहां तक आरोप लगाया है कि पुलिस, सरकार और यहां तक कि कुछ हद तक न्यायिक प्रक्रिया भी कथित आरोपी के पक्ष में झुकी हुई प्रतीत होती है। उनके अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में पीड़ित बटुकों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनकी कोई मदद नहीं कर रहा है और बटुकों के साथ सरासर अन्याय हो रहा है।
जान का खतरा और सुरक्षा का अभाव
सबसे गंभीर आरोप उन्होंने अपनी और पीड़ित बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगाए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि उन्हें और पीड़ित बटुकों को किसी भी प्रकार की सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है, जबकि उन्हें अपनी जान का वास्तविक खतरा महसूस हो रहा है। ऐसे असुरक्षित और विषम हालात में उन्होंने इस लड़ाई से स्वयं को अलग करने का कठोर निर्णय लिया है।
क्या है यह बटुक यौन शोषण मामला?
यह पूरा विवाद ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके एक शिष्य से जुड़ा है। न्यायालय के आदेश पर प्रयागराज के झूंसी थाने में इनके खिलाफ एक केस दर्ज किया गया था।
- आरोप: शिकायत में दो शिष्यों (बटुकों) के यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
- घटनाओं का समय: यह कथित घटनाएं जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच की बताई गई थीं।
- स्थान: आरोप था कि कुंभ मेला 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान लगे शिविरों में, और यहां तक कि कैंप के बाहर खड़ी गाड़ियों में भी ऐसी घटनाएं हुईं।
- कानूनी धाराएं: पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (पहले भारतीय दंड संहिता) और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
- शिकायतकर्ता का दावा: आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया था कि पीड़ित बच्चे लंबे समय से डर और दबाव में थे, इसलिए वे सामने नहीं आ पा रहे थे।
आगे क्या होगा?
फिलहाल, आशुतोष ब्रह्मचारी ने इस लड़ाई से सक्रिय रूप से पीछे हटने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में उनके लिए सक्रिय भूमिका निभाना संभव नहीं है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और पुलिस पर टिकी हैं कि वे इस संवेदनशील मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं और क्या पीड़ित बटुकों को न्याय मिल पाएगा। यह ताजा अपडेट इस मामले में एक नया और चिंताजनक मोड़ लेकर आया है।